मोदी फेल हुए तो क्या इन 'पांच' की निकलेगी लॉटरी?
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यूं तो इस बार भाजपा मोदी के करिश्माई व्यक्तित्व से चौंधियाई हुई जबरदस्त तरीके से चुनाव प्रचार में जुटी है। सर्वे बता रहे हैं कि मोदी की लहर है, जनता में मोदी को लेकर उत्सुकता है। यहां तक कि विरोधी दल भी मोदी के खौफ में आ गए हैं।
लेकिन समय की कोई गारंटी नहीं है। क्रिकेट की तरह राजनीति में भी समय कब बदल जाए, कोई नहीं जानता।
ऐसा ही कुछ अगर मोदी के साथ हो गया तो क्या होगा? किन्हीं कारणों से मोदी प्रधानमंत्री नहीं बन पाए तो क्या होगा।
चौंकिए मत, देश भर में मोदी को प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के तौर पर प्रचारित कर रही भाजपा के पास मोदी का विकल्प भी तैयार है और उस पर अमल करने के लिए फार्मूले भी।
पहला फार्मूला -सुषमा स्वराज
अगर भाजपा को बहुमत के लिए जरूरी 272 का आंक़ड़ा नहीं मिलता है तो भाजपा इस फार्मूले पर काम करेगी।
लेकिन मोदी का कथित सांप्रदायिक चेहरा कई समर्थक दलों को पसंद नहीं आएगा और इस लिहाज से पार्टी मोदी की जगह सुषमा को प्रधानमंत्री बना सकती है।
सुषमा के नाम पर राजग के घटक दलों को आपत्ति नहीं है। वहीं दूसरी कुछ ऐसे दल भी भाजपा को बाहर से समर्थन दे सकते हैं जो मोदी के नाम पर भाजपा से खार खाते हैं, जैसे जदयू।
महिला होना भी सुषमा को पीएम पद के लिए समर्थन जुटाने में सहायता करेगा। यूं भी किसी जाने माने राजनीतिक ज्योतिषी ने कहा है कि इस बार कोई महिला प्रधानमंत्री के पद की शोभा बढ़ाएगी।
दूसरा फार्मूला - राजनाथ सिंह
भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह यूं तो नरेंद्र मोदी को पीएम बनाने के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं लेकिन स्पष्ट बहुमत की स्थिति में उनको भी जोरदार मौका मिल सकता है।
राजनाथ की खासियत है की वो कभी भी अपनी नीति और महत्वाकांक्षा सामने वाले पर जाहिर नहीं करते। वो आडवाणी के भी भले हैं और मोदी के भी। वो संघ के भी प्रिय हैं और दूसरे दलों को भी सही लगते हैं।
दूसरी खास बात राजनाथ का साफ रिकार्ड उनको ये खास मौका दे सकता है। मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री बनने के बावजूद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई मामला नहीं है।
दूसरे, उनकी छवि कट्टरवादी भी नहीं है, मुसलमानों से माफी मांगने की बात करके भी राजनाथ ने कई दलों का रुख अपने प्रति नरम कर लिया है। मोदी के अलावा अगर युवा नेतृत्व की बात की जाए तो राजनाथ के नाम पर कई पार्टियां भाजपा को सर्पोट कर सकती हैं।
तीसरा फार्मूला - जयललिता
जगत अम्मा यानी जे जयललिता ने भी पीएम बनने की संभावनाओं को पर लगा लिए हैं। राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई के मसले पर कांग्रेस से जयललिता की ठन गई है।
हालांकि मामला बढ़ाया गया है लेकिन फिर भी जयललिता राजग के साथ जुड़ सकती हैं ऐसे आसार नजर आ रहे हैं।
मोदी अगर पीएम नहीं बन पाते तो राजग में जया के नाम पर आम सहमति के आसार बन रहे हैं। हालांकि डीएमके अध्यक्ष करुणानिधि में मोदी को दोस्त बता चुके हैं लेकिन राजग जया को साथ लेने पर विचार कर सकता है।
सबसे खास बात जदयू जैसे दल भी जया के नाम पर राजग में फिर से लौट सकते हैं।
चौथा फार्मूला - चंद्रबाबू नायडू
ये एक ऐसा छिपा हुआ नाम है जिसे राजग ने दूसरे विकल्प के तौर पर चुना है। ये नाम भाजपा ने नहीं बल्कि राजग ने सोचा है। साइबराबाद के नाम से मशहूर चंद्रबाबू नायडू टीडीपी के अध्यक्ष है।
तेलंगाना मामले पर कांग्रेस से खासे नाराज नायडू अपनी गैर सांप्रदायिक छवि और साफ राजनीतिक परिदृश्य के चलते राजग घटक दलों को मंजूर हो सकते हैं। नायडू राजनीति में काफी लंबे समय से बने हुए हैं।
पांचवां फार्मूला - आडवाणी
दशकों से पीएम इन वेटिंग बने हुए आडवाणी का भाग्य इस बार मोदी के दुर्भाग्य से जुड़ा हुआ है। अगर भाजपा को पूर्ण बहुमत न मिला तो उसे समर्थन लेने के लिए छोटे मोटे दलों का साथ लेना पड़ेगा।
मोदी के नाम पर बिदकने वाले ये दल आडवाणी के नाम पर साथ दे सकते हैं।
मोदी भले ही इस समय मीडिया में पॉपुलर हों लेकिन राजनीतिक पटल पर अभी भी आडवाणी की स्वीकार्यता मोदी से ज्यादा है और भाजपा भी इस बात को जानती है।