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सुप्रीम कोर्ट के जज ने की गीता पढ़ाने की वकालत

Sun, 03 Aug 2014 02:05 PM IST
Updated Sun, 03 Aug 2014 02:05 PM IST
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if i am dictator compulsary geeta and mahabharat from 1 class

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एआर दवे ने शनिवार को कहा कि भारत को उसकी प्राचीन परंपरा में बदलते हुए छोटी उम्र में ही बच्चों को महाभारत और भगवद् गीता पढ़ाना चाहिए।

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ग्लोबलाइजेशन के दौर में मानवाधिकार के समाने चुनौतियां और मुद्दे विषय पर एक सम्मेलन में उन्होंने कहा कि हमारी प्राचीन ‘गुरु शिष्य परंपरा’ खत्म हो गई है।
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उन्होंने कहा कि यदि यह परंपरा होती तो आज हमारे सामने ये समस्याएं (हिंसा और आतंकवाद) नहीं होतीं। जस्टिस दवे ने कहा कि आज हम अधिकतर देशों में आतंकवाद देख रहे हैं। अधिकतर देश लोकतांत्रिक हैं... यदि एक लोकतांत्रिक देश में हर कोई अच्छा होता तो वह स्वभाविक रूप से बहुत अच्छे का चुनाव करता और वह व्यक्ति कभी किसी को नुकसान पहुंचाने के बारे में नहीं सोचता।

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'पहली कक्षा से गीता पढ़वाता'

if i am dictator compulsary geeta and mahabharat from 1 class

गुजरात लॉ सोसायटी की ओर से आयोजित सम्मेलन में उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति धर्मनिरपेक्ष या तथाकथित धर्मनिरपेक्ष हैं वे सहमत नहीं होंगे लेकिन अगर मैं तानाशाह होता तो पहली कक्षा में ही गीता और महाभारत शुरू करवाता। यह वह रास्ता है जिससे आप जीवन जीना सीखते हैं। यदि कोई कहता है कि मैं धर्मनिरपेक्ष हूं या मैं धर्मनिरपेक्ष नहीं हूं, तो मैं कुछ नहीं कर सकता, लेकिन यदि कुछ अच्छा है तो हमें उसे कहीं से भी लेना चाहिए।

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