सुप्रीम कोर्ट के जज ने की गीता पढ़ाने की वकालत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एआर दवे ने शनिवार को कहा कि भारत को उसकी प्राचीन परंपरा में बदलते हुए छोटी उम्र में ही बच्चों को महाभारत और भगवद् गीता पढ़ाना चाहिए।
ग्लोबलाइजेशन के दौर में मानवाधिकार के समाने चुनौतियां और मुद्दे विषय पर एक सम्मेलन में उन्होंने कहा कि हमारी प्राचीन ‘गुरु शिष्य परंपरा’ खत्म हो गई है।
उन्होंने कहा कि यदि यह परंपरा होती तो आज हमारे सामने ये समस्याएं (हिंसा और आतंकवाद) नहीं होतीं। जस्टिस दवे ने कहा कि आज हम अधिकतर देशों में आतंकवाद देख रहे हैं। अधिकतर देश लोकतांत्रिक हैं... यदि एक लोकतांत्रिक देश में हर कोई अच्छा होता तो वह स्वभाविक रूप से बहुत अच्छे का चुनाव करता और वह व्यक्ति कभी किसी को नुकसान पहुंचाने के बारे में नहीं सोचता।
'पहली कक्षा से गीता पढ़वाता'
गुजरात लॉ सोसायटी की ओर से आयोजित सम्मेलन में उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति धर्मनिरपेक्ष या तथाकथित धर्मनिरपेक्ष हैं वे सहमत नहीं होंगे लेकिन अगर मैं तानाशाह होता तो पहली कक्षा में ही गीता और महाभारत शुरू करवाता। यह वह रास्ता है जिससे आप जीवन जीना सीखते हैं। यदि कोई कहता है कि मैं धर्मनिरपेक्ष हूं या मैं धर्मनिरपेक्ष नहीं हूं, तो मैं कुछ नहीं कर सकता, लेकिन यदि कुछ अच्छा है तो हमें उसे कहीं से भी लेना चाहिए।