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अलर्ट गंभीरता से लेते तो नहीं होता हैदराबाद ब्लास्ट

Fri, 22 Feb 2013 09:46 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 22 Feb 2013 09:46 PM IST
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if alert take seriously not happen hyderabad blast

हैदराबाद धमाके को लेकर विपक्ष के तीखे तीरों का सामना करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने संसद के दोनों सदनों को भरोसा दिया है कि सरकार दोषियों को सजा देने में कतई कमजोर नहीं पड़ेगी। दरअसल, विपक्ष ने शिंदे पर आतंकवाद के मुद्दे पर लापरवाह होने का आरोप लगाया था।

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उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में ठोस कदम उठाएगी और हिचकेगी नहीं। हालांकि उन्होंने इस बात पर निराशा जाहिर की कि अलर्ट को गंभीरता से नहीं लिया गया। शिंदे ने कहा कि खुफिया सूचनाओं को कई बार गंभीरता से नहीं लिया जाता है, क्योंकि खुफिया अलर्ट में कोई तय समय नहीं दिया जाता बल्कि आने वाले दस दिनों में कोई घटना होने की आशंका जताई जाती है।
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हालांकि शिंदे ने कहा कि अब खुफिया सूचना पहले से काफी सटीक होती है और खुफिया एजेंसियों के बीच पहले से अधिक बेहतर समन्वय स्थापित है। शिंदे के लिखित बयान देने के बाद भाजपा ने उनको आतंकवाद की घटना को हलके में लेने का आरोप लगाया।
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राज्यसभा में सदन को जानकारी देते हुए शिंदे ने कहा कि हैदराबाद को 16, 19 और 20 फरवरी को अलर्ट भेजा गया था। राज्य सरकार को कहा गया था कि अजमल कसाब और अफजल गुरू की फांसी का बदला पाकिस्तान के आतंकी संगठन किसी वारदात को अंजाम देकर ले सकते हैं।

भाजपा नेता वेंकैया नायडू ने कहा कि शिंदे को तुरंत घटनास्थल पर जाना चाहिए था और सुबह सदन में मौजूद होकर संसद को इसकी जानकारी देनी चाहिए थी।

विपक्ष के आरोप के जवाब में शिंदे ने कहा कि वह सारी रात सोए नहीं। वह सुबह चार बजे ही हवाई अड्डे पहुंच गए थे और सुबह सात बजे हैदराबाद में घटनास्थल पर पहुंच गए।

शिंदे ने सफाई दी कि घटना के तुरंत बाद वीआईपी दौरे से सबूत और सुराग जुटाने में पुलिस और सुरक्षा एजेसियों को परेशानी होती है। सारी पुलिस वीआईपी के दौरे में व्यस्त हो जाती है जोकि कतई ठीक नहीं है, इसलिए वह शुक्रवार सुबह गए।

एनसीटीसी बनाने पर फिर जोर
हैदराबाद में ब्लास्ट के बाद केंद्र सरकार आतंकवाद रोधी केंद्र यानी एनसीटीसी के गठन को लेकर फिर गंभीर हो गई है। एनसीटीसी पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम का ड्रीम प्रोजेक्ट था और उनके वित्त मंत्रालय में जाने के बाद यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई थी।

लेकिन शुक्रवार को गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने एनसीटीसी को लेकर खुलकर विपक्ष से सहयोग मांगा। उन्होंने कहा कि वह एनसीटीसी पर विपक्ष शासित राज्यों के ऐतराज को दूर करने के लिए तैयार हैं। खुफिया सूचनाओं पर तालमेल के लिए एनसीटीसी का गठन जरूरी माना जा रहा है।

पूरी रात नहीं सोया: शिंदे
गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि हैदराबाद धमाकों के गुनहगारों को कानून के कठघरे में लाने के लिए कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी जाएगी। घटना को हलके में लेने के विपक्ष के आरोपों पर शिंदे ने कहा कि वह सारी रात सोए नहीं। वह सुबह 4 बजे ही एयरपोर्ट पहुंच गए थे और सुबह 7 बजे हैदराबाद में घटनास्थल पर पहुंच गए।

हैदराबाद को भेजा था खास अलर्ट
सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की ओर से हैदराबाद समेत चार शहरों को आतंकी हमले की आशंका को लेकर खास अलर्ट भेजा गया था। बृहस्पतिवार सुबह भेजे गए अलर्ट में कहा गया था कि अजमल कसाब और अफजल गुरू की फांसी का बदला लेने के लिए पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन हैदराबाद, बंगलूरू, कोयंबटूर या हुबली को निशाना बना सकते हैं।

हालांकि इसमें यह जिक्र नहीं था कि हमला कब और कहां हो सकता है। गुजरात और महाराष्ट्र सरकार को भी अलर्ट भेजा गया था। जबकि 19 और 20 फरवरी को सभी राज्यों को अलर्ट किया गया था। लेकिन बृहस्पतिवार को भेजा अलर्ट खास तौर पर चार शहरों के लिए था।

रेड्डी बोले, मिलते रहते हैं ऐसे अलर्ट
लेकिन आंध्र के मुख्यमंत्री किरण रेड्डी का कहना है कि अलर्ट में आतंकी हमले के बारे में कोई विशेष सूचना नहीं थी। यह सामान्य अलर्ट था। रेड्डी ने यहां तक कहा कि इस तरह के अलर्ट केंद्र से मिलते रहते हैं।


चोटें भी पहले जैसी  
हैदराबाद के दो धमाकों का शिकार हुए लोगों को उसी तरह की चोटें आई हैं, जिस तरह यहां 2007 के ब्लास्ट के पीड़ितों को आई थीं। जानकारों का कहना है कि यह धमाके उसी तरह के हैं। हालांकि इस बार चोटें पहले से कुछ कम गंभीर हैं।

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