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गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड को देना होगा आई कार्ड
देहरादून/ब्यूरो
Updated Wed, 28 Nov 2012 12:38 PM IST
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उत्तराखंड में गिरते लिंगानुपात से निपटने के लिए अब रेडियोलाजिस्टों पर नकेल कसी जाएगी। राज्य पर्यवेक्षक बोर्ड ने पीएनडीटी एक्ट के नए दिशा निर्देशों के तहत एक रेडियोलाजिस्ट को सिर्फ दो अस्पतालों में ही प्रैक्टिस की अनुमति दी है। वहीं अल्ट्रासाउंड कराने वाली फार्म-एफ के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए गर्भवती महिला की अल्ट्रासाउंड के समय उससे आई कार्ड भी लिया जाएगा।
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स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी की अध्यक्षता में मंगलवार को 108 सभागार में हुई राज्य पर्यवेक्षक बोर्ड की बैठक में भ्रूण हत्या रोकने के लिए कई फैसले लिए गए। इसके तहत निजी प्रैक्टिस करने वाले रेडियोलाजिस्ट सिर्फ दो अस्पतालों में कार्य कर सकेंगे, जिसके लिए अस्पताल के बाहर उनके प्रैक्टिस करने का समय अंकित करना अनिवार्य होगा। अभी एक रेडियोलाजिस्ट कई अस्पतालों में पंजीकृत हैं और वहां उनके नाम पर अल्ट्रासाउंड जांच किया जाता है।
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वहीं अल्ट्रासाउंड के समय गर्भवती से आईडी लेने की अनिवार्यता को बोर्ड ने ट्रायल पर शुरू करने के निर्देश दिए हैं। यह व्यवस्था अभी पंजाब में है। वहीं प्रसव का रिकार्ड रखने वाली आशा कार्यकत्रियों को स्वास्थ्य मंत्री ने प्रति केस 50 रुपए प्रोत्साहन राशि से बढ़ाकर पांच सौ रुपए प्रतिमाह करने के आदेश दिए।
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मंत्री ने स्पष्ट किया है कि विभाग इसे गंभीरता से ले और संवेदनशील जिलों में निरीक्षण का कार्य तेजी से किया जाए। बैठक में विधायक विजय बड़थ्वाल, अपर सचिव स्वास्थ्य पीयूष सिंह मौजूद रहे।
एमबीबीएस चिकित्सक को ही जांच की अनुमति
छह माह का कोर्स करने के बाद अल्ट्रासाउंड करने वाले एमबीबीएस डाक्टरों के लिए नए नियम लागू होंगे। इसके तहत स्टेट मेडिकल काउंसिल ऐसे केंद्र चिह्नित करेगी, जिससे छह माह का कोर्स करने वाले एमबीबीएस चिकित्सक को ही अल्ट्रासाउंड मशीन पर टेस्ट करने की अनुमति होगी।
बोर्ड में हुए अहम फैसले
- जन्म पंजीकरण डाटा केंद्रीकृत बनाने को हर संबंधित विभागों में तालमेल।
- आईईसी के तहत जनपदों में चलेगा कन्या बचाओ जागरूकता कार्यक्रम।
- लिंग जांच की सूचना पर पांच हजार का पुरस्कार, नाम रहेगा गोपनीय।
- अल्ट्रासाउंड मशीन विक्रेता कंपनियां विभाग को बताएंगी किसे बेची मशीन।
- दो बच्चियों वाले परिवारों को जिला सलाहकार समितियां करेंगी सम्मानित।
- स्पेशल टास्क फोर्स का गठन, जो अल्ट्रासाउंड केंद्रों का करेगी निरीक्षण।
- राज्य का अपना लीगल सेल, पीएनडीटी के मामले की करेगा सुनवाई।