नरेंद्र मोदी के लिए आईबी लीक कर रही है खबरें!
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सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के अंदर यह चर्चा होने लगी है कि प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार नरेंद्र मोदी पर आतंकियों का खतरा वाकई कितना वास्तविक और असली है।
इंडियन मुजाहिदीन (आईबी) पर गहरी चोट करने वाले ताजा ऑपरेशन में शामिल अधिकारी खुद ही सवाल उठा रहे हैं कि मोदी पर आतंकी खतरे की बात इतने जोर शोर से क्यों और कैसे उछल गई।
गुजरात दंगों के बाद से ही हैं निशाने पर
अधिकारियों के मुताबिक पाक आतंकी वकास की गिरफ्तारी के बाद अब तक इस बात की तस्दीक नहीं हो पाई है कि आईएम का इरादा मोदी को फिदायीन हमले में मारने का था या नहीं।
मोदी पर आतंकी खतरे की बात कोई नई नहीं बल्कि 2002 के गुजरात दंगे के बाद से ही वह आतंकी निशाने पर हैं।
खुफिया विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का एक तबका शक जाहिर कर रहा है कि सुरक्षा एजेंसी के कुछ लोग जानबूझकर मीडिया में ऐसी खबर लीक कर रहे हैं जिससे लोगों में मोदी के प्रति सहानुभूति पैदा हो।
जेड प्लस सुरक्षा के घेरे में हैं मोदी
खुफिया विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि चुनावी माहौल में इस तरह की सहानुभूति कहीं न कहीं लोगों को प्रभावित करती है। अधिकारी के मुताबिक यह वोट ध्रुवीकरण के लिए एक कारगर औजार है।
आईएम आतंकी तहसीन और वकास को गिरफ्तार करने वाले दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जोधपुर से मिले हथियार और इनकी पूछताछ से इनके चुनाव में वारदात करने के इरादे का पता चलता है लेकिन जेड प्लस सुरक्षा घेरे में रहने वाले मोदी को मारने का दुस्साहस यह शायद ही करेंगे।
फिदायीन हमले का खतरा!
मोदी की सुरक्षा घेरे को देखते हुए यह तभी संभव है जब आईएम फिदायीन हमलावर पैदा करने लगे। अधिकारी के मुताबिक अब तक की जांच में आईएम के फिदायीन हमले की बात सामने नहीं आई है।
जहां तक आतंकियों से खतरे का सवाल है उसमें मोदी ही नहीं, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और लालकृष्ण आडवाणी भी आते हैं।वरिष्ठ आईबी अधिकारी ने बताया कि मोदी पर खतरा 2002 के गुजरात दंगे के बाद से ही है।
पहले भी सामने आईं हैं ऐसी सूचना
शोहराबुद्दीन, सादिक जमाल, इशरत जहां और उसके तीन साथियों के फर्जी एनकाउंटर इसलिए किए गए कि यह सब मोदी को ही मारने जा रहे थे। यह खुफिया जानकारी आईबी और गुजरात पुलिस के अधिकारियों ने दी थी।
लेकिन इन तीनों मामलों की जांच कर रही सीबीआई को अब तक इस बात के ठोस सबूत नहीं मिले हैं कि इनका मकसद मोदी के कड़े सुरक्षा घेरे को तोड़ कर उन्हें मारने का था।
पटना रैली में हुए थे धमाके
पटना में मोदी की रैली में आतंकी धमाके के सवाल पर अधिकारी ने कहा कि वह सुरक्षा चूक थी जिसकी वजह से आतंकी कम ताकत के धमाके करने में कामयाब हुए।
उनका मकसद मोदी को मारना नहीं बल्कि लोगों में दहशत फैलाना था। अगर आईएम आतंकी मोदी को मारने पर इतने ही आमादा होते तो उस तरह की तैयारी के साथ आते। लेकिन जांच में ऐसी कोई बात सामने नहीं आई।