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इनसे लें आईएएस बनने की प्रेरणा

Thu, 09 May 2013 04:56 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क। Updated Thu, 09 May 2013 04:56 PM IST
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ias toppers achivers's story by themselves

अगर हिम्मत और लगन हो तो विपरीत हालातों के बावजूद मंजिल पाई जा सकती है। इस बार संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में बाजी मारने वाले लोगों में कई लोग इस बात का उदाहरण है।

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यहां ऐसे पांच टॉपरों का जिक्र करना जरूरी है जिन्होंने गरीबी, सामाजिक दबाव और रोकटोक के बावजूद अपने सपनों को पूरा किया और दूसरों के लिए मिसाल पैदा की।

मऊ के निरीष राजपूत

मध्यप्रदेश में भिंड जिले के गोहद विकासखंड के मऊ कस्बे के दर्जी वीरेंद्र राजपूत के बेटे निरीष राजपूत ने इस साल की आईएएस की परीक्षा में 370वीं रैक हासिल की है।
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निरीष की लगन ही थी कि आर्थिक दिक्कतों के चलते दो साल पढ़ाई छोड़ने और दो बार असफल होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी।

निरीष ने किसी भी कोचिंग संस्थान की मदद न लेकर इस मिथक को भी तोड़ दिया कि देश की इस सबसे बड़ी चुनौतीपूर्ण परीक्षा में पेशेवर लोगों के मार्गदर्शन और महंगे कोचिंग संस्थानों की मदद के बगैर सफलता अर्जित नहीं की जा सकती।
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गुजरात की कोमल गनात्रा

सोचिए जरा, विवाह हो और पंद्रह ही दिन बाद पति हमेशा के लिए छोड़कर विदेश चला जाए। लेकिन गुजरात के अमरेली की कोमल गनात्रा ने इसे चुनौती की तरह लिया। दहेज की मांग के चलते पति द्वारा छोड़े जाने के बाद कोमल ने पांच साल की अथक मेहनत के बाद आईएएस की परीक्षा पास कर ली है।

कोमल का कहना है कि हर लड़की की तरह उन्होंने भी सुखद भविष्य के सपने देखे थे। लेकिन धन के लालच में एनआरआई पति शैलेश पोपट जब उन्हें छोड़कर चला गया तो उन्होंने इसे एक चैलेंज की तरह लिया। कोमल ने फैसला किया कि वो समझौता करने की बजाय अब आईएएस बनकर दिखाएंगी।

कोमल का सपना है कि कलेक्टर बनने के बाद वो समाज में फैली कुरीतियों को हटाने का प्रयास करें।

हरियाणा की अनुराधा पाल

हरियाणा की अनुराधा पाल को आईएएस बनने की इतनी लगन थी कि उन्होंने आर्थिक परिस्थितियों को मुंहतोड़ जवाब दिया।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद अनुराधा आईएएस की कोचिंग करना चाहती थी लेकिन उनके परिवार के पास इतने पैसे नहीं थे कि अनुराधा कोचिंग कर पाती।

ऐसे में अनुराधा ने फैसला किया कि वो कोचिंग के लिए पैसे एकत्र करेंगी। अनुराधा ने तीन साल तक एक इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाकर पैसे एकत्र किए और फिर दिल्ली जाकर एक कोचिंग इंस्टीट्यूट को ज्वाइन किया।

कमाल देखिए कि अनुराधा ने पहले ही प्रयास में सिविल सेवा में बाजी मार ली।

कुपवाड़ा की रुवैदा सलाम

कोई डाक्टरी की पढ़ाई करने के बाद आईएएस के लिए जीतोड़ मेहनत करे तो क्या कहा जाएगा। जी हां, डॉक्टरी के बाद शादी करके आम युवती की तरह जीवन बिताने की बजाय रुवैदा सलाम ने सार्वजनिक जीवन में सेवा करने को प्राथमिकता दी।

रुवैदा के डॉक्टरी करने के बाद से ही उसके परिवार वाले शादी का दबाव बना रहे थे। लेकिन रुवैदा कुछ अलग करना चाह रही थी। रुवैदा ने परिवार के दबाव के बावजूद परीक्षा की तैयारी की और बाजी भी मार ली।

जोधपुर की स्तुति चरण

सपने देखने के लिए जाति, धर्म और पैसा कोई मायने नहीं रखता। इस बार आईएएस की परीक्षा में सामान्य, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग ने शानदार प्रदर्शन किया है।


इसी क्रम में जोधपुर के एक छोटे से गांव की स्तुति चरण ने परीक्षा राजस्थान में टॉप किया है। स्तुति ने बताया कि परिवार में बेटियों को ज्यादा पढ़ाने का रिवाज था।

परिवार पर ज्यादा आर्थिक बोझ न पड़े और इसीलिए स्तुति ने कोई कोचिंग नहीं ली और वो खदि 10 घंटे तक पढ़ाई किया करती थी।

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