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वायुसेना के पायलट ले रहे खास दवा, हर पल रहेंगे सजग

Mon, 08 Feb 2016 03:58 PM IST
Updated Mon, 08 Feb 2016 03:58 PM IST
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IAF pilots using pop pills to enhance their alertness to get fighting edge

भारतीय वायु सेना ने अपने बेड़े में एक नए हथियार को शामिल किया है। यह हथियार कोई मिसाइल, स्मार्ट बम या सुपर सोनिक विमान नही हैं बल्कि एक टैबलेट है। जी नहीं, वीडियो गेम खेलने वाला टैबलेट नहीं खाने वाला टैबलेट (दवा) जिसे 'गो/नो गो पिल्स' नाम दिया गया है।

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यह दवा का इस्तेमाल खासकर फाइटर पायलट करते हैं जिससे उनकी क्षमता में जबरदस्त ईजाफा हो जाता है। इस दवा को वायु सेना में आधिकारिक तौर पर शामिल किया गया है जो बिल्कुल भी हानिकारक नहीं है।
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सेना ने अपने फाइटर पायलटों पर इस दवा का परीक्षण भी किया जिसके उन्हें अच्छे परिणाम मिले। इन दवाओं का इस्तेमाल कठिन सैन्य अभ्यासों और लड़ाई के दौरान किया जाता है। ये दो दवाओं का एक सम्मिश्रण है जो दो अलग-अलग तरह से काम करता है।

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डुएल मोड में करता है काम

IAF pilots using pop pills to enhance their alertness to get fighting edge

इसमें से पहला जिसे 'गो पिल' के नाम से जाना जाता है वह मोडाफिनिल की गोली है। इसका इस्तेमाल सतर्कता बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा दूसरी गोली को 'नो-गो पिल' है जिसके लिए जोल्पिडेम की गोली का इस्तेमाल किया जाता है। यह अनिद्रा दूर करती है।

दुनिया के लगभग सभी विमानन संस्थान इस दवा का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस दवा के सेवन से पायलट और ज्यादा सचेत हो जाता है और लंबी दुरी की यात्रा के दौरान भी उसे थकान महसूस नहीं होता।

पिछले तीन-चार सालों से भारतीय वायु सेना भी इसका इस्तेमाल कर रही है। 31 अक्टूबर से 8 नवंबर तक चले 'लाइववायर' सैन्य अभ्यास में इस दवा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया गया। इस अभ्यास में वायु सेना के देश में मौजूद सभी 54 एयरबेस ने हिस्सा लिया था।

युद्ध जैसे माहौल में काफी कारकर

IAF pilots using pop pills to enhance their alertness to get fighting edge

फाइटर पायलटों के अलावा हेलिकॉप्टर पायलट और एयर ट्राफिक कंट्रोलर्स ने भी इसका इस्तेमाल किया। इस दौरान इसके कोई दुष्प्रभाव देखने को नहीं मिला। लाइववायर अभ्यास में वायुसेना के सभी विभागों ने कई दिनों तक लगातार काम किया।

इसके लिए पूरा युद्ध जैसा माहौल तैयार किया गया था। इस स्थिति में इस दवा का प्रयोग काफी कारगर रहा। सुखोई के पायलट के मुताबिक नो गो पिल आपके दिमाग को शांत कर दिया है और आप उस वक्त किसी भी चिंता से दूर रहते हैं।

सुखोई विमान एक बार में करीब 3,200 किमी की यात्रा तय कर सकता है और अगर उसे बीच हवा में ही तेल मिल जाए तो यह दूरी दोगुनी हो जाती है। इस लिहाज से एक पायलट को कई घंटे तक लगातार विमान उड़ाना पड़ता है। युद्ध जैसी स्थिति में तो ये हालात और खराब हो जाते हैं। ऐसे में इस दवा के इस्तेमाल से काफी फायदा होगा। हालांकि, इस दवा का इस्तेमाल केवल सैन्य अभ्यास और युद्ध जैसी स्थितियों में ही किया जाता है।

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