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काश! मैं भी प्रदर्शन में शामिल हो पाता
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Mon, 21 Jan 2013 10:01 PM IST
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चलती बस में दरिंदगी की घटना ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर को भी बेहद व्यथित कर दिया था। इसका खुलासा सोमवार को खुद चीफ जस्टिस ने किया। उन्होंने कहा कि 16 दिसंबर को दिल्ली में गैंगरेप की घटना के बाद हुए प्रदर्शन पूरी तरह जायज और बेहद जरूरी थे। काश मैं भी प्रदर्शनों में शामिल हो पाता, लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सका। चीफ जस्टिस ने इन प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वालों को सलाम भी किया।
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जस्टिस कबीर ने कहा कि उस दिन (16 दिसंबर) जो भी हुआ, वह कोई नई घटना नहीं थी। लेकिन इस घटना ने लोगों का ध्यान खींचा। इस घटना पर लोगों का गुस्सा बिलकुल जायज था। लोग प्रदर्शन कर अपने गुस्से का ही इजहार कर रहे थे। यह सब कुछ खुद ब खुद हो रहा था और जरूरी भी था।
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उन्होंने कहा कि इंडिया गेट पर प्रदर्शनों के दौरान मेरे भतीजे की भी पिटाई कर दी गई। महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा रोकथाम कानून पर आयोजित छठे सम्मेलन में शिरकत करने पहुंचे चीफ जस्टिस ने कहा कि हमें हालांकि ऐसे समूहों से सतर्क रहना चाहिए, जो इस तरह के माहौल का फायदा उठाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पहले प्रदर्शन शांति पूर्ण तरीके से शुरू हुआ था, लेकिन बाद में इन प्रदर्शनों को हाईजैक कर लिया गया, जिससे बात बिगड़ गई।
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चीफ जस्टिस ने कहा कि गैंगरेप की यह घटना केवल एक शख्स के खिलाफ नहीं थी, बल्कि यह महिलाओं और समाज के खिलाफ थी। इस घटना ने सोचने पर मजबूर कर दिया कि हमारे समाज में यह सब क्या हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि वाहनों से काले शीशे और पर्दे हटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया जाता तो चलती बस में गैंगरेप की घटना नहीं हो सकती थी।
चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों की सुनवाई करने वाले जजों की सोच में भी बदलाव लाए जाने की जरूरत है। हममें से बहुत से जज ऐसे मामलों में असंवेदनशील रहते हैं। हम कानून के कड़े शब्दों को देखते हैं। लेकिन न्यायिक अधिकारियों को महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों को लेकर संवेदनशील रहना चाहिए क्योंकि ये समाज का सबसे कमजोर वर्ग है। इसलिए काूनन के केवल शब्दों पर मत जाइए, बल्कि उसकी भावना भी देखिए। दोनों को एक साथ रखकर सोचिए।