मुख्यमंत्री ने कहा, मैं हिटलर जैसा बनना चाहता हूं
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव का कहना है कि अन्याय के खात्मे के लिए वह हिटलर जैसा बनना चाहते हैं। उन्होंने 19 अगस्त को व्यापक स्तर पर होने वाले परिवार सर्वेक्षण के अपनी सरकार के फैसले का भी बचाव किया।
इस बीच तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच विभिन्न मुद्दों को सुलझाने के लिए राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन की मौजूदगी में राव ने चंद्रबाबू नायडू से मुलाकात की।
राव ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि केसीआर हिटलर है तो कुछ अन्य लोग कहते हैं कि केसीआर तानाशाह है। उन्होंने कहा कि निसंदेह चोरों के लिए केसीआर हिटलर है और भ्रष्ट लोगों के लिए मैं हिटलर बनना चाहता हूं।
'हिटलर का दादा भी बन सकता हूं'
के चंद्रशेखर राव ने कहा कि यह बात कहने में मुझे कोई शर्म नहीं है कि अन्याय के खात्मे के लिए केसीआर हिटलर है। मैं इसके लिए हिटलर का दादा भी बन सकता हूं। प्रस्तावित सर्वे के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य निर्धारित वर्गों तक सरकार की सुविधाओं को पहुंचाना सुनिश्चित करना है।
उन्होंने इन आरोपों को खारिज कर दिया कि सर्वे का मकसद सीमांध्र के लोगों की पहचान करना है।
उन्होंने कहा कि ऐसी खबरें बिल्कुल गलत हैं। तेलंगाना राष्ट्र समिति सरकार लक्ष्य निर्धारित सरकार बनना चाहती है। इस सर्वे का मकसद गरीब और आम जनता की मदद करना है। इस सर्वे को लेकर भाजपा और टीडीपी सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं। दोनों पार्टियां इस सर्वे की आड़ में सीमांध्र के लोगों की पहचान करने का सरकार पर आरोप लगा रही हैं।
बिना सलाह मशविरे आंध्र का बंटवारा : नायडू
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू का कहना है कि राज्य के बंटवारे से पहले उन समस्याओं पर गौर ही नहीं किया गया जो बाद में उत्पन्न हो सकती हैं।
उन्होंने बंटवारे के परिणामों पर श्वेतपत्र जारी करते हुए आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश का बंटवारा केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार की झख और मर्जी के कारण किया गया। केंद्र ने बंटवारे की प्रक्रिया के दौरान सलाह मशविरा नहीं किया और न ही दोनों राज्यों के प्रभावी शासन के लिए आवश्यक संस्थाओं के बारे में कुछ कहा।
उन्होंने कहा कि राज्य के विभाजन ने विशेषत: तेलुगु लोगों को बांट दिया क्योंकि तत्कालीन सरकार ने बंटवारे के दौरान पृथक राज्य के लिए नई राजधानी का निर्णय नहीं किया था।
अब आंध्र प्रदेश के लिए हैदराबाद की तरह की राजधानी के निर्माण के लिए पांच लाख करोड़ रुपये की जरूरत होगी।
'तेलुगु भाषी लोगों को बांटा और उनमें मतभेद पैदा किए'
नायडू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पूर्व शासकों ने राज्य को बांटने के अपने निर्णय के कारण तेलुगु भाषी लोगों को बांटा और उनमें मतभेद पैदा किए। बंटवारे के कारण राज्य को होने वाले वित्तीय नुकसान को ठीक करने का सांविधिक आश्वासन दिया गया लेकिन नौवीं अनुसूची में 89 समस्याएं हैं।
उन्होंने कहा कि तेलंगाना की तुलना में शेष आंध्र प्रदेश पर कर्ज का भार अधिक है और दोनों राज्यों के लिए भारतीय प्रशासनिक और पुलिस सेवा जैसी केंद्रीय सेवाओं के अधिकारियों का आवंटन किया जाना अभी बाकी है।
उन्होंने कहा कि नौवीं और दसवीं अनुसूची में कृषि विश्वविद्यालय के बारे में उल्लेख नहीं है। दोनों राज्यों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के वास्ते विचार-विमर्श करना आवश्यक है। दोनों राज्यों के साथ समान न्याय होना चाहिए।
नायडू ने कहा कि बंटवारे के समय उन्होंने कहा था कि राज्य का बंटवारा उचित और परामर्श देने योग्य नहीं है। यदि कानून के अनुसार फैसला किया जाता तो कोई समस्या नहीं होती।