'देश का पहला लोकपाल बनने के लिए तैयार'
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निवर्तमान चीफ जस्टिस पी. सदाशिवम् देश के प्रथम लोकपाल बनने या सेवानिवृत्ति के बाद कोई और जिम्मेदारी लेने के खिलाफ नहीं है। बशर्ते इस संबंध में बगैर किसी विवाद के सर्वसम्मति से निर्णय लिया जाए। जस्टिस सदाशिवम् ने शुक्रवार को कहा कि यदि लोकपाल बनाने पर सबकी सहमति हो तो निश्चित ही मैं इसे स्वीकार करूंगा।
चीफ जस्टिस ने उनके समक्ष पेश सर्वोच्च अदालत के दो पूर्व न्यायाधीशों के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतों के बारे में कोई भी टिप्पणी करने से परहेज किया। जस्टिस सदाशिवम महसूस करते हैं कि केंद्र सरकार के प्रमुख नौकरशाहों की तरह ही चीफ जस्टिस का कार्यकाल भी कम से कम दो साल का होना चाहिए। याद रहे कि जस्टिस सदाशिवम् न्यायपालिका के सर्वोच्च पद पर नौ महीने रहने के बाद शनिवार को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
रिटायरमेंट के बाद अहम पदों पर सकते हैं काम
उन्होंने स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्ति के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष या लोकपाल जैसे पद स्वीकार करने में उन्हें कोई गुरेज नहीं है। लेकिन यह बगैर किसी विवाद के होना चाहिए और पूर्व चीफ जस्टिस के अनुरूप होना चाहिए।
जजों की नियुक्ति के मसले पर जस्टिस सदाशिवम ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में हम संबंधित हाईकोर्टों के मुख्य न्यायाधीशों से उचित परामर्श के बाद न्यायाधीशों की नियुक्ति करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर राज्य के महाधिवक्ता की राय भी लेते हैं।
यदि न्यायपालिका से बाहर के किसी व्यक्ति को शामिल किया जाता है तो हो सकता है कि उन्हें न्यायपालिका के बारे में जानकारी नहीं हो और न्यायाधीशों के चयन के लिये वह उचित नहीं होगा।