फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   I am not a political activist:ahmer khan

जानिए, स्मृति ईरानी को मुश्किल में डालने वाले अहमर खान को

Fri, 03 Jul 2015 01:42 PM IST
Updated Fri, 03 Jul 2015 01:42 PM IST
विज्ञापन
I am not a political activist:ahmer khan

मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की डिग्री मामले में याचिका दायर करने वाले अहमर खान का कहना है कि उन्होंने स्मृति के खिलाफ याचिका सिर्फ मीडिया में आईं खबरों के आधार पर दी है। वह कोई राजनीतिक दल के कार्यकर्ता नहीं हैं।

विज्ञापन


गौरतलब है कि अहमर खान ने स्मृति के खिलाफ ये याचिका दिल्ली की पटियाला कोर्ट में दाखिल की थी। उनकी याचिका पर दिल्ली की एक अदालत ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। इसका मतलब है कि अब अदालत ये जांच करेगी कि ये याचिका कितनी प्रमाणिक है।
विज्ञापन


कौन है अहमर खान?
जब तक अहमर खान ने स्मृति के खिलाफ याचिका दाखिल नहीं की थी तब तक उन्हें कोई नहीं जानता था, हालांकि वह दिल्ली में जरूरतमंदों के अधिकारों के लिए लड़ते रहे हैं चाहे वो खोमचे वालों की लड़ाई हो या रेंट कट्रोल एक्ट को दिल्ली में लागू करवाने के लिए आवाज उठाना। पेशे से लेखक और दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक खान इस काम को अपने दो साथियों तपन कुमार और नलिन मिश्रा के साथ करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


अपनी उपलब्धियों को बताते हुए खान कहते हैं कि खोमचे वालों से अवैध वसूली के लिए उनकी पीआईएल पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जज से जांच करवाई, जिसका फैसला कोर्ट ने सुरक्षित रखा है।

उनके कार्य दिल्ली तक ही सीमित नहीं है पिछले साल उन्होंने हिसार में चार लड़कियों से बलात्कार की घटना के खिलाफ हरियाणा के हिसार में आवाज उठायी और दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया था।

क्या है मामला?

I am not a political activist:ahmer khan

याचिकाकर्ता का कहना है कि स्मृति ने चुनाव आयोग के सामने तीन एफिडेविट पेश किए थे और तीनों में अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में अलग-अलग जानकारी दी।

उनकी याचिका के अनुसार अप्रैल 2004 में स्मृति ने कहा था कि उन्होंने बीए की पढ़ाई दिल्ली युनिवर्सिटी के पत्राचार कार्यक्रम से पूरी की।

जुलाई 2011 में गुजरात राज्य सभा चुनाव से पहले एक एफिडेविट में उन्होंने कहा था कि उन्होंने बीए (कॉमर्स) (पार्ट एक) तक पढ़ाई दिल्ली युनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ करस्पॉंडेंस से की, लेकिन पिछले साल लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि उन्होंने बीए (कॉमर्स) की पढ़ाई दिल्ली युनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग से पूरी की है।

अहमर खान का कहना है कि ये मामला शिक्षित या अशिक्षित होने का नहीं है बल्कि ये बड़ा मुद्दा इसलिए है कि मानव संसाधन विकास मंत्री होते हुए भी उन्होंने इस पर ईमानदारी नहीं बरती।

कोर्ट ने इस मामले में 1 जून को सुनवाई पूरी कर ली थी पर फैसला सुरक्षित रखा था. याचिका पर अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed