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सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल बनी हैदरपुरा मजिस्द

Fri, 12 Sep 2014 07:51 PM IST
Updated Fri, 12 Sep 2014 07:51 PM IST
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hyderpora mosque now centre of communal harmony in kashmir

बाढ़ के चलते आई मुसीबत की घड़ी में यहां के हैदरपुरा क्षेत्र की जामा मस्जिद सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक बनी हुई है। मस्जिद में नमाज पढ़ने के अलावा बाढ़ में अपने घर से दूर हुए लोगों को सिर छुपाने की जगह भी मिल रही है।

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इन लोगों में बड़ी संख्या में हिंदू भी शामिल हैं। घाटी में सैंकड़ों लोगों के लिए यहां राहत शिविर लगाए गए हैं और उनके लिए खाने के इंतजाम किए जा रहे हैं। इनमें बहुत से ऐसे हिंदू लोग हैं, जो बाहरी राज्यों से यहां काम करने के लिए आए हुए हैं।
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इन सभी ने इसी मस्जिद में शरण ली हुई है। मस्जिद तक बाढ़ का पानी नहीं पहुंच सका है। यहां शरण लेने वाले लोगों के पास खौफ और दहशत की अपनी एक कहानी है।
फोटो-सोशल मीडिया

मस्जिद बनी सांप्रदायिक सद्भाव का केंद्र

hyderpora mosque now centre of communal harmony in kashmir

कुछ खुद बचकर यहां पहुंचे तो कुछ सेना या स्थानीय लोगों की मदद से। सरकारी नौकरी करने वाले बशीर अहमद अखून ने बताया, ‘मैंने अपने परिवार के तीन सदस्यों के साथ रविवार को अपन घर छोड़ा और नाव का इंतजाम किया। सबसे पहले मैंने अपनी बेटी को मस्जिद भेजा। इसके बाद बाकी लोग यहां पहुंचे।

तभी से हम यहीं पर रह रहे हैं। मस्जिद में हिंदू लोग भी हमारे साथ रह रहे हैं।’ फर्नीचर का काम करने वाले 26 साल के मोहम्मद आसिफ ने बताया कि बाढ़ की वजह से उसका परिवार उससे बिछुड़ गया था। किसी ने उसे मस्जिद में उन्हें ढूंढने का कहा और वे सभी यहां पर मिल गए।

हैदरपुरा जामा मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष हाजी गुलाम नबी धर ने बताया कि रोजाना मस्जिद में ढाई हजार लोगों का खाना बन रहा है। बारामुला, कुपवाड़ा और सोपोर से बड़ी संख्या में लोगों ने यहां आकर शरण ली है।

उन्होंने कहा, ‘हमने पिछले शुक्रवार को यहां कैंप लगाने का फैसला किया था। सरकार ने इस काम में हमारी कोई मदद नहीं की है। स्थानीय लोगों की मदद से ही हमने यहां पर इंतजाम किए हैं।’ उन्होंने कहा कि लोग प्रशासन से नाराज हैं क्योंकि उन्होंने पीड़ितों के लिए कुछ नहीं किया।

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