सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल बनी हैदरपुरा मजिस्द
बाढ़ के चलते आई मुसीबत की घड़ी में यहां के हैदरपुरा क्षेत्र की जामा मस्जिद सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक बनी हुई है। मस्जिद में नमाज पढ़ने के अलावा बाढ़ में अपने घर से दूर हुए लोगों को सिर छुपाने की जगह भी मिल रही है।
इन लोगों में बड़ी संख्या में हिंदू भी शामिल हैं। घाटी में सैंकड़ों लोगों के लिए यहां राहत शिविर लगाए गए हैं और उनके लिए खाने के इंतजाम किए जा रहे हैं। इनमें बहुत से ऐसे हिंदू लोग हैं, जो बाहरी राज्यों से यहां काम करने के लिए आए हुए हैं।
इन सभी ने इसी मस्जिद में शरण ली हुई है। मस्जिद तक बाढ़ का पानी नहीं पहुंच सका है। यहां शरण लेने वाले लोगों के पास खौफ और दहशत की अपनी एक कहानी है।
फोटो-सोशल मीडिया
मस्जिद बनी सांप्रदायिक सद्भाव का केंद्र
कुछ खुद बचकर यहां पहुंचे तो कुछ सेना या स्थानीय लोगों की मदद से। सरकारी नौकरी करने वाले बशीर अहमद अखून ने बताया, ‘मैंने अपने परिवार के तीन सदस्यों के साथ रविवार को अपन घर छोड़ा और नाव का इंतजाम किया। सबसे पहले मैंने अपनी बेटी को मस्जिद भेजा। इसके बाद बाकी लोग यहां पहुंचे।
तभी से हम यहीं पर रह रहे हैं। मस्जिद में हिंदू लोग भी हमारे साथ रह रहे हैं।’ फर्नीचर का काम करने वाले 26 साल के मोहम्मद आसिफ ने बताया कि बाढ़ की वजह से उसका परिवार उससे बिछुड़ गया था। किसी ने उसे मस्जिद में उन्हें ढूंढने का कहा और वे सभी यहां पर मिल गए।
हैदरपुरा जामा मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष हाजी गुलाम नबी धर ने बताया कि रोजाना मस्जिद में ढाई हजार लोगों का खाना बन रहा है। बारामुला, कुपवाड़ा और सोपोर से बड़ी संख्या में लोगों ने यहां आकर शरण ली है।
उन्होंने कहा, ‘हमने पिछले शुक्रवार को यहां कैंप लगाने का फैसला किया था। सरकार ने इस काम में हमारी कोई मदद नहीं की है। स्थानीय लोगों की मदद से ही हमने यहां पर इंतजाम किए हैं।’ उन्होंने कहा कि लोग प्रशासन से नाराज हैं क्योंकि उन्होंने पीड़ितों के लिए कुछ नहीं किया।