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रोहित की मां बोली, 'मेरा बेटा ताकतवर लोगों के षड्यंत्र से मरा'

Wed, 20 Jan 2016 01:14 PM IST
Updated Wed, 20 Jan 2016 01:14 PM IST
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Hyderabad University rohith vemula suicide Update.

हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला अपनी मौत के बाद जातीय आधार पर होने वाले अन्याय और भेदभाव के खिलाफ संघर्ष का चेहरा बन कर उभरे हैं।

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उनकी आत्महत्या के बाद हैदराबाद सहित देश भर में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

26 साल के रोहित हैदराबाद विश्वविद्यालय के रिसर्च स्कॉलर थे और उन्हें विश्वविद्यालय प्रबंधन ने हॉस्टल से निष्कासित कर दिया था।

इसके बाद बीते रविवार को उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के बैनर से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वे आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के गरीब परिवार से आते थे।

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मां को था रोहित के घर आने का इंतजार

Hyderabad University rohith vemula suicide Update.

रोहित की मां को अपने बेटे की आत्महत्या की दुखभरी खबर तब मिली जब उन्हें अगले सप्ताह रोहित के घर आने का इंतजार था।

बेटे को गंवाने के बाद उनकी व्याकुल मां ने बताया, 'वह परिवार के लिए रोजी रोटी जुटाने वाला इकलौता सदस्य था। विश्वविद्यालय से मिलने वाले पैसे में से कुछ हिस्सा वह घर भेजता था।'

वह कहती हैं, 'मेरा बेटा इसलिए मरा क्योंकि कुछ ताक़तवर लोगों ने अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करते हुए उसके खिलाफ षड्यंत्र किया। कम से कम अब तो उन्हें चार अन्य छात्रों का निलंबन वापस लेना चाहिए।'

उनके लिखे अंतिम पत्र को पढ़ने वाले हर शख्स को उनकी बेहतरीन सोच-समझ और शानदार लेखनी की झलक मिलती है।

उनके नजदीकी दोस्त पी. विजय रोहित के बारे में बताते हैं, 'वह काफी मेहनती और प्रतिभाशाली था। वह काफी दयालु भी था।'

'रोहित को पढ़ने का था शौक'

Hyderabad University rohith vemula suicide Update.

विजय के मुताबिक रोहित नियमित तौर पर कक्षाओं में शामिल होते और ज्यादातर समय पुस्तकालय में बिताते थे।

विजय कहते है, 'जो हुआ है, उस पर यकीन नहीं होता। वह दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत था। लेकिन वह बहुत संवेदनशील भी था और अपने आसपास की चीजों से बहुत उदास भी हो जाता था।'

रोहित विश्वविद्यालय के समाजविज्ञान विभाग से विज्ञान, तकनीकी और समाज पर पीएच.डी कर रहे थे। अपने शानदार अकादमिक करियर के चलते ही उन्हें यूजीसी की जूनियर फेलोशिप और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए दी जाने वाली राजीव गांधी नेशनल फेलोशिप मिली थी।

रोहित को क्रांति से जुड़े साहित्य पढ़ने का काफी शौक था, वे लेखक भी बनना चाहते थे।

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'रोहित को था फेलोशिप के पैसे का इंतजार'

Hyderabad University rohith vemula suicide Update.

रोहित ने अपने अंतिम पत्र में अपनी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। लेकिन इस मामले में ये लग रहा है कि रोहित अपने साथ होने वाले भेदभाव से तंग आ गए थे।

उन्होंने विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर को दिसंबर में लिखे पत्र में कहा था कि दलित छात्रों के कमरे में एक रस्सी मुहैया करानी चाहिए। उन्होंने उससे पहले ये भी लिखा था, 'हम लोगों को इस तरह अपमानित करने की जगह नामांकन के समय ही हमें जहर दे देना चाहिए।'

पिछले कई महीनों से रोहित आर्थिक तंगी का सामना कर रहे थे, क्योंकि उन्हें फेलोशिप का पैसा नहीं मिल रहा था। रोहित ने अपने अंतिम पत्र में लिखा है कि उनके फेलोशिप के 1.75 लाख रुपये बाकी है और उन्होंने अपने किसी दोस्त से 40 हजार रुपये उधार लिए हुए थे।

उसने अपने दोस्तों से ये सुनिश्चित करने की अपील की है कि पैसा उनकी मां और छोटे भाई को मिल जाए। लेकिन उनके दोस्तों का मानना है कि रोहित अपने साथ होने वाले व्यवहार से आजिज आ गए थे।

उनके एक दोस्त डी प्रशांत ने कहा, 'वह इसलिए भी परेशान था क्योंकि तमाम विरोध प्रदर्शनों का वाइस चांसलर पर कोई असर नहीं हो रहा था और रोहित को उसकी निम्न जाति का एहसास दिलाया जा रहा था।'

दोस्तों ने बताया 'क्या सोचता था रोहित'

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वैसे पढ़ाई के साथ-साथ रोहित की कविताओं में भी दिलचस्पी थी। इसके अलावा वे दलित छात्रों के धरना प्रदर्शन में भी हिस्सा लेते थे और पहाड़ियों पर चढ़ने का भी शौक था।

डी प्रशांत के मुताबिक, 'कैंपस की पहाड़ियां उसके पसंदीदा ठिकाने थे।'

रोहित के साथ विश्वविद्यालय से निलंबित सी. सेशैया इस मामले की शुरुआत के बारे में बताते हैं, 'तीन अगस्त को कैंपस में विरोध प्रदर्शन के दौरान झगड़ा हुआ था। एबीवीपी के सदस्यों ने हम पर तब हमला किया जब हम मुजफ्फरनगर दंगों पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म पर बैन लगाए जाने का विरोध कर रहे थे। विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने प्राथमिक जांच में हमें क्लीन चिट दी थी। लेकिन 21 दिसंबर को वाइस चांसलर ने हमें हॉस्टल से निकालने का आदेश जारी कर दिया।'

सेशैया इसके लिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को भेजे गए राज्य मंत्री बंडारू दत्तात्रेय के पत्र को जिम्मेदार मानते हैं जिसमें इन छात्रों पर वीसी से कार्रवाई करने की मांग की गई थी।

वहीं दूसरी ओर एबीवीपी के नेता सुशील कुमार इन आरोपों को खारिज करते हैं। उन्होंने बताया, 'उन लोगों ने हम पर हमला किया था, हमने पुलिस से उनकी शिकायत की थी।'

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