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शक की सुई लश्कर, इंडियन मुजाहिद्दीन पर
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Fri, 22 Feb 2013 01:01 AM IST
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आतंकियों ने हैदराबाद में धमाके कर खुफिया एजेंसियों के डर को सच साबित कर दिया। एजेंसियां हैदराबाद पर कई महीनों से नजर गड़ाए बैठी थी।
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पिछले कुछ महीनों से पुराने हैदराबाद के ऐतिहासिक चारमीनार के पास स्थित भाग्यलक्ष्मी मंदिर के चलते कई बार भड़के सांप्रदायिक तनाव को एमआईएम विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी के भड़काऊ भाषण ने और बढ़ा दिया था। केंद्र ने भी राज्य सरकार को इस बाबत कई बार सतर्क किया था। इन धमाकों को लेकर जांच एजेंसियों के रडार पर एक बार फिर आतंकी संगठन लश्कर और इंडियन मुजाहिद्दीन (आईएम) हैं।
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खुफिया सूत्रों के मुताबिक हालांकि अभी कुछ भी पक्के तौर पर कहना जल्दबाजी होगी। मगर इस घटना के पीछे सांप्रदायिक कारण होने से इनकार नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि लश्कर-ए-ताइबा और आईएम के अलावा आतंकवाद के सभी पहलुओं पर गौर किया जा रहा है।
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सूत्रों का कहना है कि धमाके की शुरुआती शक्ल को देखकर यह साफ हो गया है कि इसके पीछे कोई छोटा संगठन नहीं है। इसके पीछे बड़ी साजिश ने काम किया है।
गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा है कि सुरक्षा एजेंसियों के अलावा आईबी की टीम ने भी काम करना शुरू कर दिया है। हैदराबाद पहले भी आतंकियों के निशाने पर रहा है। पिछले दिनों पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा का प्रमुख और 26/11 आरोपी हाफिज सईद ने हैदराबाद को लेकर बयान दिया था।
उसके मुताबिक जम्मू-कश्मीर के साथ हैदराबाद और जूनागढ़ का भी पाकिस्तान में विलय होना चाहिए क्योंकि अंग्रेजों के छोड़ने के वक्त यहां मुसलमान शासकों का राज्य था, जिसे भारत ने जबरन अपने में मिला लिया।
लश्कर की इस मंशा के साथ चारमीनार पर मंदिर को लेकर विवाद और ओवैसी बंधुओं के भड़काऊ और घृणा फैलाने वाले भाषण ने पूरे शहर से सांप्रदायिक माहौल को बिगाड़ दिया था। इसी वजह से खुफिया एजेंसियों को अंदेशा था कि हैदराबाद को आतंकी निशाना बनाया जा सकता है।