बिहार का जनादेश संसद ठप करने के लिए नहीं: गृहमंत्री
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संसद का शीतकालीन सत्र 26 नवंबर से 23 दिसंबर तक चलेगा। संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर के सम्मान और इसी दिन संविधान को अपनाए जाने की याद में 26 और 27 नवंबर को संसद के दोनों सदनों का विशेष बैठक आयोजित किया जाएगा।
कैबिनेट की संसदीय मामलों की गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस आशय का फैसला लिया गया। बिहार विधानसभा चुनाव के बाद हो रहे शीत सत्र में विपक्ष के साथ टकराव की आशंका के मद्देनजर सरकार ने आर्थिक सुधारों से जुड़े विधेयकों को पारित करने में सहयोग की अपील की है।
सरकार ने कहा है कि विपक्ष सत्र को संसद को बाधित करने के लिए मिले जनादेश के तौर पर न लें। उल्लेखनीय है कि विपक्ष के साथ पहले से ही टकराव के रास्ते पर चल रही सरकार के सामने इस सत्र में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सहित कई महत्वपूर्ण आर्थिक बिलों को कानूनी जामा पहनाने की चुनौती है।
जीएसटी पर चर्चा
सीसीपीए की बैठक के बाद संसदीय कार्यमंत्री ने शीत सत्र के कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए विपक्ष से सरकार का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बिहार का जनादेश संसद में कामकाज बाधित करने के लिए नहीं है। देश के विकास के लिए सरकार को कई अहम बिल पारित कराने हैं। ऐसे में देशहित में विपक्ष को शीत सत्र में सरकार का सहयोग करना चाहिए।
नायडू ने बताया कि भारत के संविधान को अपनाए जाने की याद में 26 और 27 नवंबर को दोनों सदनों की विशेष बैठक होगी। उन्होंने कहा कि सरकार अंबेडकर का जन्म शताब्दी वर्ष मना रही है। ऐसे में हमने निर्णय किया है कि संविधान के प्रति प्रतिबद्धताओं और अंबेडकर के योगदान पर संसद में चर्चा कराई जाए। विशेष बैठक के कारण सत्र के पहले दो दिन प्रश्नकाल नहीं होगा।