कालेधन का पनाहगाह रहा है एचएसबीसी बैंक
दुनिया के सबसे बड़े बैंकों में से एक एचएसबीसी हथियार व्यापारियों, डायमंड का व्यवसाय करने वालों व कई अंतरराष्ट्रीय गैर कानूनी संगठनों के साथ बिजनेस करके लाभ कमाता रहा है।
अंग्रेजी दैनिक इंडियन एक्प्रेस के अनुसार दस्तावेजों के आधार पर स्विस बैंकिंग सिस्टम के ऐसे गोपनीय नियम कानूनों का खुलासा हुआ है जिसे दुनिया ने पहले नहीं देखा था। लंदन स्थित मुख्यालय वाले एचएसबीसी की दुनिया के 74 देशों और छह महाद्वीपों में शाखाएं हैं।
वैश्विकस्तर पर स्विस बैंक के खातों संबंधी खुलासों के बाद ब्रिटेन के एचएसबीसी ने पुरानी गलतियों को स्वीकार करते हुए गैरकानूनी पूंजी प्रवाह पर कड़े नियंत्रण की बात कही है। एचएसबीसी का कहना है कि नए खातों के संदर्भ में पिछले कुछ सालों में उसने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
इस बात की पुष्टि, उसके स्विस प्राइवेट बैंक के 2007 से ग्राहकों की संख्या में 70 प्रतिशत की कमी से की जा सकती है। ईमेल के जरिए जारी अपने बयान में कंपनी ने खातों के संदर्भ में नियमों के अनुपालन संबंधी पिछली गलतियां स्वीकार करते हुए कहा कि हम इन मामलों में जांच करने वाली एजेंसियों व संस्थाओं का पूरा सहयोग कर रहे हैं।
कदमों पर सवाल
कई मामलों में एचएसबीसी का व्यवहार सवालों के घेरे में रहा है। वह अपने ग्राहकों को उनके खातों की जानकारी उनके मूल देशों को न देने की बात कहता है। इतना ही नहीं वह अपने ग्राहकों को यह सलाह देता है कि वह कैसे अपने देशों में टैक्स के भुगतान से बच सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय किरदार हैं शामिल
सूची में सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद, चीन के पूर्व प्रधानमंत्री की बेटी ली पेंग, महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की भतीजी प्रिंसेस माइकल ऑफ केंट समेत कई बड़े वर्तमान और पूर्व राजनेता भी शामिल हैं। खाताधारकों में क्लिंटन फाउंडेशन के प्रमुख दानदाताओं समेत फॉर्मूला वन चैंपियन माइकल शूमाकर, हथियार व्यापारी शैलेश विथलानी भी शामिल हैं।
अलकायदा व ब्लड डायमंड से जुड़ाव
जुलाई 2012 में यूएस सीनेट ने एचएसबीसी के ग्राहक के रूप अलकायदा से जुड़ाव की रिपोर्ट सार्वजनिक की थी। युद्धक्षेत्र में आने वाली खदानों से निकालने वाली हीरों को बाहर बेचने वाले इमैनुअल शैलप समेत अन्य ब्लैक डायमंड व्यापारी भी एचएसबीसी के ग्राहक रहे हैं।
चोरी के आंकड़ों से ली गई है नई ‘एचएसबीसी सूची’
स्विस बैंक में खाता रखने वाले 1000 से अधिक भारतीयों के नए नाम सामने आने के बाद स्विट्जरलैंड की सरकार ने कहा है कि चोरी के आंकड़ों से यह नई ‘एचएसबीसी सूची’ का खुलासा हुआ है। स्विस प्रशासन के इस बयान से ऐसा लगता है कि बिना किसी अतिरिक्त साक्ष्य के भारत के लिए इन खातों के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल करना मुश्किल होगा।
हालांकि, स्विस सरकार ने यह भी कहा कि वह कुछ साल पहले नीतियों में हुए बदलाव के बाद काले धन की समस्या से निपटने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इंवेस्टीगेटिव जर्नालिस्ट्स (आईसीआईजे) की ओर से एचएसबीसी की स्विस शाखा के एक लाख से अधिक खाताधारकों के नाम सामने लाने पर स्विस सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह नई सूची वर्ष 2007 और उससे पहले चोरी हुए आंकड़ों पर आधारित है।
इस सूची में 1668 भारतीयों के नाम हैं। इनमें से कई नाम दो बार आए हैं। ऐसे में कार्रवाई किए जा सकने वाले मामलों की संख्या 1195 हैं। स्विस बैंकों में अवैध धन जमा न हो, इसको लेकर स्विस प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों के बारे में पूछे जाने पर प्रवक्ता ने कहा कि वर्ष 2009 से उनकी सरकार ने अपनी वित्तीय बाजार नीति में बदलाव किया है और वह इस मामले में अंतरराष्ट्रीय मानक का पालन करने और कर चोरी के खिलाफ कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।