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UGC के इतिहास में ऐसा होगा पहली बार
टीम डिजिटल
Updated Thu, 05 Sep 2013 04:45 PM IST
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यूजीसी के इतिहास में जो आज तक नहीं हुआ वो अब होने वाला है। 57 सालों के इतिहास में पहली बार एक यूजीसी के सदस्य को हटाने की तैयारी चल रही है।
आप पार्टी के सदस्य योगेन्द्र यादव को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सदस्य पद से हटाने का नोटिस केन्द्र सरकार ने भेजा है।
बुधवार को केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने राजनीतिक विशेषज्ञ और यूजीसी सदस्य योगेन्द्र यादव को नोटिस भेजकर एक सप्ताह में कारण बताने के लिए कहा है।
मंत्रालय के आधिकारियों के मुताबिक अगर एक सप्ताह के भीतर योगेन्द्र यादव ने जवाब नहीं दिया तो उन्हें तत्काल हटा दिया जाएगा।
मंत्रालय के मुताबिक योगेन्द्र यादव के आप पार्टी में शामिल होने के बाद से ही उनको वर्तमान पद से हटाने की बात चल रही थी।
वहीं योगन्द्र यादव का कहना है कि आप पार्टी में शामिल होते समय ही उन्होंने मंत्रालय को इस्तीफे की पेशकश की थी।
पर उस समय मंत्रालय ने उन्हें काम जारी रखने के लिए कहा था।
उस समय मैंने लिख कर अपने इस्तीफे की पेशकश की थी। अब सरकार उसके 10 महीने बाद इस मुद्दे को उछाल रही है।
योगेन्द्र यादव को यूजीसी के सदस्य पद से हटाने को लेकर मंत्रालय के लिखे पत्र से आयोग के एक स्वायत्त संस्था होने पर भी सवाल उठने लगा है।
अगर योगेन्द्र यादव को हटा दिया जाता है तो 57 साल में पहली बार यूजीसी के किसी भी सदस्य को हटाने का पहला मामला होगा।
इससे पहले योगेन्द्र यादव ने दिल्ली यूनिवर्सिटी में चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम का विरोध किया था।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के कोड ऑफ कंडेक्ट में किसी के राजनीतिक पार्टी के सदस्य होने पर पाबंदी नहीं है।
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आप पार्टी के सदस्य योगेन्द्र यादव को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सदस्य पद से हटाने का नोटिस केन्द्र सरकार ने भेजा है।
बुधवार को केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने राजनीतिक विशेषज्ञ और यूजीसी सदस्य योगेन्द्र यादव को नोटिस भेजकर एक सप्ताह में कारण बताने के लिए कहा है।
मंत्रालय के आधिकारियों के मुताबिक अगर एक सप्ताह के भीतर योगेन्द्र यादव ने जवाब नहीं दिया तो उन्हें तत्काल हटा दिया जाएगा।
मंत्रालय के मुताबिक योगेन्द्र यादव के आप पार्टी में शामिल होने के बाद से ही उनको वर्तमान पद से हटाने की बात चल रही थी।
वहीं योगन्द्र यादव का कहना है कि आप पार्टी में शामिल होते समय ही उन्होंने मंत्रालय को इस्तीफे की पेशकश की थी।
पर उस समय मंत्रालय ने उन्हें काम जारी रखने के लिए कहा था।
उस समय मैंने लिख कर अपने इस्तीफे की पेशकश की थी। अब सरकार उसके 10 महीने बाद इस मुद्दे को उछाल रही है।
योगेन्द्र यादव को यूजीसी के सदस्य पद से हटाने को लेकर मंत्रालय के लिखे पत्र से आयोग के एक स्वायत्त संस्था होने पर भी सवाल उठने लगा है।
अगर योगेन्द्र यादव को हटा दिया जाता है तो 57 साल में पहली बार यूजीसी के किसी भी सदस्य को हटाने का पहला मामला होगा।
इससे पहले योगेन्द्र यादव ने दिल्ली यूनिवर्सिटी में चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम का विरोध किया था।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के कोड ऑफ कंडेक्ट में किसी के राजनीतिक पार्टी के सदस्य होने पर पाबंदी नहीं है।