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IIM के मुद्दे पर विवादों में स्मृति का मंत्रालय

Fri, 19 Jun 2015 04:00 PM IST
Updated Fri, 19 Jun 2015 04:00 PM IST
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HRD ministry plan on the issue of IIM

भारतीय प्रबंधन संस्थान यानी आईआईएम की स्वायत्तता पर नियंत्रण को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय की मंशा सवालों के घेरे में है।

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आईआईएम से जुड़े बिल के मसौदे में मंत्रालय ने एक ऐसा प्रावधान रखा है, जिसके तहत संस्थान की निर्णय प्रणाली में केंद्र सरकार का मत ही अंतिम फैसला माना जाएगा। इसमें कहा गया है कि प्रभावी प्रशासन के लिए केंद्र सरकार समय-समय पर संस्थान को लिखित तौर पर कह सकती है।

मंत्रालय ने बिल को लोगों की राय के लिए जारी करने का भले ही सुरक्षित रास्ता अपनाया हो मगर इसमें सरकार ने आईआईएम के कामकाज में सीधे दखलंदाजी की बात कही है।
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कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

HRD ministry plan on the issue of IIM

मसौदे में आईआईएम के बोर्ड ऑफ गवर्नर को प्रमुख कार्यकारी निकाय माना गया है। यह निकाय संस्थान से जुड़े फैसलों का प्रस्ताव रखेगा मगर संस्थान की फीस, पाठ्यक्रम और सेवाओं के बारे में अंतिम निर्णय केंद्र सरकार का ही होगा।

सरकार ने संस्थान के पदाधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यकाल, वेतन और अन्य नियम-शर्तों से संबंधित निर्णयों में अपनी भागीदारी की बात की है। इस विधेयक को लाने का मकसद आईआईएम को कानूनी स्वरूप देना है।

इन संस्थानों की स्थापना किसी कानून के तहत नहीं हुई है। इसलिए संस्थान अभी डिग्री की बजाय पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा देता है। वहीं कांग्रेस ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है।

कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. अजय कुमार ने कहा कि बिल के मसौदे से मोदी सरकार की असली मंशा सामने आ गई है। सरकार को इस मसौदे को वापस लेना चाहिए।

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