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ऐसे खुलता और चलता है स्विस बैंक का खाता
नोएडा/इंटरनेट डेस्क
Updated Sat, 10 Nov 2012 08:36 AM IST
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अरविंद केजरीवाल के अनुसार भारत में स्विस बैंक में खाता खोलना एसबीआई में खाता खोलने से कहीं आसान है। व्यक्ति को सिर्फ एचएसबीसी से फोन पर संपर्क करने की जरूरत होती है। इसके बाद बैंक अपना एक व्यक्ति संपर्क करने वाले के पास भेजता है। वह व्यक्ति सिर्फ एक फॉर्म भरवाता है और अपने साथ पैसे ले जाता है। यह पैसा जेनेवा या दुबई में बैंक की शाखा में जमा कर दिया जाता है। इस प्रकार खाता खुल जाता है। खाता खोलने के लिए विदेश जाने की जरूरत नहीं पड़ती। इसी प्रकार खाते से लेन-देन भी घर बैठे हो जाता है।
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खाताधारक को बैंक जेनेवा शाखा के एक व्यक्ति का फोन नंबर देता है। पैसा जमा कराने के लिए उस व्यक्ति को फोन करना होता है और एचएसबीसी का प्रतिनिधि आकर पैसा ले जाता है। रुपये में दी गई रकम के बराबर डॉलर स्विस खाते में पहुंच जाते हैं। इसके विपरीत अगर पैसा निकलवाना हो तो जेनेवा फोन कर देने मात्र से भारत में एचएसबीसी का प्रतिनिधि मांगी गई रकम दे जाता है। कारोबार की इस पद्धति को ही ‘हवाला’ कहा जाता है। फेमा और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत यह अपराध है।
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एचएसबीसी: धनी ग्राहकों का बैंक
- एचएसबीसी (हांगकांग एंड शंघाई बैंकिंग कारपोरेशन) एक मल्टीनेशनल बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी है। इसका मुख्यालय लंदन में है। यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बैंक है। दुनिया के 85 देशों में इसकी 7200 से ज्यादा शाखाएं हैं। दुनिया भर में इसके 40 लाख से ज्यादा ग्राहक हैं। एचएसबीसी में बचत खाता खोलने के लिए प्रतिमाह औसत राशि 75000 रुपये होने की शर्त है। ऐसे में बैंक के पास हमेशा ही धनी ग्राहक पहुंचते हैं। बदले में बैंक ग्राहकों को खास सुविधाएं देता है।
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कालेधन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
- विदेशों में जमा भारतीयों का कालाधन राष्ट्र की लूट है। -19 जनवरी 201 को कहा
- मामले की पड़ताल के लिए एसआईटी के गठन का विरोध करने पर सरकार को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि एसआईटी का गठन जरूरी है क्योंकि दूसरी जांच एजेंसियां तीन साल में धन का स्रोत का पता तक नहीं लगा सकीं। -29 मार्च, 2011 को कहा
- काला धन मामले में सरकार ने अब तक कुछ नहीं किया। यह सिर्फ कर चोरी का मामला नहीं है कि सरकार की नींद नहीं टूट रही है। -21 अप्रैल 2011 को कहा
विदेशी बैंकों में भारतीय का काला धन
70 लाख करोड़ रुपये : सुप्रीम कोर्ट में दायर अनिल दीवान की याचिका में
1000 अरब डॉलर : विभिन्न राजनीतिक दलों और कुछ अन्य संगठन
24.5 लाख करोड़ रुपये : सीबीआई निदेशक एपी सिंह
25 लाख करोड़ रुपये : भाजपा
400 लाख करोड़ रुपये : बाबा रामदेव
75 लाख करोड़ रुपये : स्विस बैंकर्स एसोसिएशन