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कब-कब मची मक्का में भगदड़, हादसों पर एक नजर

Thu, 24 Sep 2015 03:55 PM IST
Updated Thu, 24 Sep 2015 03:55 PM IST
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How often resembled a stampede in Mecca

मुस्लिमों के सबसे बड़े तीर्थ मक्का मदीना में हज यात्रा के दौरान शैतान को पत्थर मारने की प्रथा के बीच भगदड़ मचने से करीब सैकड़ों की लोगों की मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि मरने वालों का आंकड़ा बढ़ सकता है। हादसे में 400 लोग जख्मी भी बताए जा रहे हैं।

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यह हादसा उस वक्त हुआ जब शैतान को पत्थर मारने की परंपरा के दौरान कुछ श्रद्धालु उसी रास्ते से वापस लौट रहे थे, जो रास्ता आने का था। बताया जा रहा है कि इसी बीच किसी अफवाह के कारण भगदड़ मची और चारों ओर चीख-पुकार सुनाई देने लगी।
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मक्का में भगदड़ की यह घटना पहली बार नहीं हुई है। अभी हाल ही में क्रेन गिरने से मक्का में 107 लोगों की मौत हो गई थी। इससे पहले भी कई बार शैतान को पत्थर मारने के दौरान ही भगदड़ मचने से हजारों लोगों की मौत हो चुकी है।

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जनवरी 2006 में भी मची थी भगदड़

How often resembled a stampede in Mecca
12 जनवरी 2006 में हज यात्रा के अंतिम दिन शैतान को पत्थर मारने के दौरान भी ऐसी ही भयानक भगदड़ मची थी। इसमें 346 श्रद्धालुओं की जान गई थी। उस वक्त हादसे में 289 लोग जख्मी हुए थे।

1 फरवरी 2004 में भी इसी प्रथा के दौरान भगदड़ मचने से 251 श्रद्धालु मारे गए थे, जबकि 244 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस घटना से ठीक एक साल पहले 11 फरवरी 2003 में पत्थर मारने के दौरान 14 लोगों की मौत हो गई थी।

2001 में 5 मार्च को पत्थर मारने की प्रथा के दौरान ही भगदड़ मचने से 35 श्रद्धालु मारे गए थे। 9 अप्रैल 1998 में जमारात पुल पर भगदड़ मचने से 118 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी, जबकि 180 लोग इस भगदड़ में घायल हुए थे।

सुरक्षा इंतजाम पर खड़े हो रहे सवाल

How often resembled a stampede in Mecca

शैतान को पत्थर मारने की प्रथा के दौरान इससे पहले भी कई बार हादसे हो चुके हैं, लेकिन इतने हादसों के बाद भी मक्का में श्रद्धालु की सुरक्षा को लेकर किए जाने वाले इंतजाम पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

23 मई 1994 में इसी परंपरा के दौरान भगदड़ मचने से करीब 270 लोगों की मौत हो गई थी। मक्का में सबसे ज्यादा मौतें 1990 में मची एक भगदड़ के दौरान हुईं थी।

2 जुलाई 1990 को एक पैदल मार्ग वाली सुरंग में अचानक मची भगदड़ से करीब 1426 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। मृतकों में मलेशिया, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के श्रद्धालु शामिल थे।

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