मोदी के बड़बोले मंत्रियों पर कैसे लगेगी लगाम?
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पिछले नौ महीने के कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए जितनी मुश्किलें विपक्ष ने खड़ी नहीं की, उससे ज्यादा मुश्किलें उन्हीं की कैबिनेट के मंत्रियों और पार्टी के सासंदों ने खड़ी की। भाजपा के सहयोगी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के नेताओं के बयानों से भी नरेंद्र मोदी को कम परेशानी नहीं हुई है।
प्रधानमंत्री के लिए नई परेशानी उनकी सरकार के बड़बोले मंत्री गिरिराज सिंह ने खड़ी की है। गिरिराज सिंह अपने बड़बोलेपन के लिए पहले भी बदनाम रहे हैं, लेकिन उनकी ताजा टिप्पणी की निहायत ही बेहूदा और नस्लीय माना जा रहा है। मुजफ्फरपुर में उनके खिलाफ मामला भी दर्ज कर लिया गया है।
गिरिराज सिंह ने मंगलवार को हाजीपुर में कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी पर विवादास्पद टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर राजीव गांधी ने किसी नाइजीरियाई लड़की से शादी की होती, उनकी चमड़ी गोरी न होती तो क्या कांग्रेस पार्टी उनका नेतृत्व स्वीकार करती?
उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिया। राहुल की गैर मौजूदगी पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि वह लापता मलेशियाई विमान की तरह गायब हो गए हैं। किसी को यह नहीं मालूम कि राहुल कहां हैं?
गिरिराज के बयान पर बरपा हंगामा
मोदी सरकार में लघु एवं सूक्ष उद्योग मंत्री (राज्य) गिरिराज सिंह के बयान पर हंगामा होना तय था। कांग्रेस समेत तमाम दलों के नेताओं और महिला संगठनों ने गिरिराज के बयान की तीखी निंदा की। गिरिराज के बयान पर नाइजीरिया भी नाराज हो गया। चेतावनी देते उसने कहा कि इस तरह की टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मामले के तूल पकड़ने के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी गिरिराज ने बयान पर खेद जताया है। नाइजीरिया की नाराजगी के बाद अमित शाह ने डैमेज कंट्रोल करने की लिए गिरिराज से फोनकर कड़ी फटकार भी लगाई।
हालांकि मामला यहीं नहीं रुका। गुरुवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गिरिराज सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। देश के कई हिस्सों में उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया और गिरिराज को पद से हटाने की मांग की।
ऐसा नहीं है कि गिरिराज पहली बार बड़बोलपन दिखाया हो। अपने बयानों के चलते पहले भी वह विवादों में आ चुके हैं। लोकसभा चुनावों के दौरान उन्होंने ये कहकर हंगामा खड़ा कर दिया था कि जो नरेंद्र मोदी के समर्थक नहीं है, वो पाकिस्तान चले जाएं।
साध्वी निरंजन ज्योति ने भी कराई किरकिरी
विवादित बयान देने वाले गिरिराज इकलौते मंत्री नहीं हैं। पिछले साल दिल्ली विधानसभा चुनावों से ठीक पहले खाद्य एवं प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने एक जनसभा में लोगों को ‘रामजादे-हरामजादे’ में से एक को चुनने को कहा था।
निरंजन ज्योति के बयान पर सरकार की काफी किरकिरी हुई थी। उन्होंने अपने बयान पर बाद में माफी मांग ली, हालांकि विपक्ष उन्हें हटाने की मांग पर अड़ गया। बयान से खफा विपक्ष ने संसद में भी कामकाज ठप कर दिया, उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मामले हस्तक्षेत करते हुए खुद खेद व्यक्त किया था।
संसद में सफाई देते हुए उन्होंने कहा था कि साध्वी निरंजन ज्योति राजनीति में नई हैं और उन्होंने अपने बयान के लिए माफी भी मांग ली है। मोदी ने निरंजन ज्येति की दलित पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए कहा था कि संसद को उन्हे माफ कर देना चाहिए।
साक्षी महाराज के बयान से भी मोदी मुश्किल में आए
मंत्रियों के अलावा संसदों के बयानों ने भी मोदी को मुश्किल में डाला। उन्नाव के सांसद साक्षी महाराज के बयान के कारण दिल्ली विधानसभा चुनावों में भाजपा की बहुत किरकिरी हुई थी। साक्षी महाराज ने हिंदू महिलाओं को चार बच्चे पैदा करने की नसीहत दी थी।
विपक्षी पार्टियों ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में साक्षी महाराज के बयान का वोटों ध्रुवीकरण करने के लिए जमकर इस्तेमाल भी किया। साक्षी महाराज ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को राष्ट्रभक्त भी बताया था। साक्षी के उस बयान पर भी भारी बवाल मचा था और उन्हें संसद में माफी मांगनी पड़ी थी।
लोकसभा चुनावों में भाजपा का सहयोगी कर चुके राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के नेता भी कई ऐसा बयान दे चुके हैं, जिससे सरकार की किरकिरी हुई है। लेकिन सवाल यह है कि उन पर बयान लगाए कौन?