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आर्थिक जगत के लिए मोदी पॉलिसी कितनी शुभ?

Mon, 18 May 2015 06:45 PM IST
Updated Mon, 18 May 2015 06:45 PM IST
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How Modi government policies are perceived in the Economic world

अभी तक मोदी सरकार ने कुछ भी नहीं किया, सिवाए बातें बनाने के। ये कहना है सिंगापुर स्थित रोजर्स होल्डिंग्स लिमिटेड के चेयरमैन और कमोडिटी ट्रेडिंग के गुरु माने जाने वाले जिम रोजर्स का।

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जिम ने कहा है कि मोदी सरकार जबसे सत्ता में आई है, तब से ही वह सिर्फ बातें कर रही है और उसने विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए कोई खास कदम नहीं उठाया है। जिम ने कहा कि ये राजनीतिक पार्टी बीजेपी भारत के लिए न कभी अच्छी थी और न ही कभी अच्छी हो सकती है।
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मोदी सरकार को जीत हासिल किए एक साल पूरा हो चुका है और अब हर ओर मोदी सरकार के कामों को लेकर चर्चा के साथ-साथ तुलना भी शुरू हो गई है। कुछ का मानना है कि मोदी सरकार की पॉलिसी इकोनॉमिक वर्ल्ड में कुछ खास दमखम नहीं दिखा पाई है। वहीं कुछ लोग कहते हैं कि मोदी सरकार ने कई सारे अच्छे काम किए हैं।

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रुपया टूटा, तेल हुआ सस्ता

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रुपया- पिछले 1 साल में मोदी की तरफ से पेश की गई पॉलिसी ने रुपए को काफी कमजोर कर दिया है। पिछले साल मई में रुपया एक डॉलर के मुकाबले 58.5 रुपए का था, लेकिन एक साल पूरा होते-होते रुपए में कमजोरी आती गई और मई 2015 में रुपया 64 रुपए के स्तर को छू चुका है।

तेल- पिछले साल मई में कच्चा तेल का दाम करीब 110 डॉलर प्रति बैरल था, लेकिन मई 2015 में इसकी कीमत गिरकर करीब 65 डॉलर प्रति बैरल रह गई है। कच्चे तेल की कीमतें गिरने से ही डीजल और पेट्रोल की कीमतों में कमी आई है।

डीजल-पेट्रोल- पिछले साल मई में पेट्रोल की कीमत 71.41 रुपए प्रति लीटर थी, जो 16 मई को 5.12 रुपए घटकर 66.29 रुपए प्रति लीटर रह गई है। हालांकि, फरवरी 2015 में पेट्रोल 56.49 रुपए प्रति लीटर तक सस्ता हो गया था। वहीं दूसरी ओर, मई 2014 में डीजल 56.71 रुपए प्रति लीटर था, जो अब तक 4.43 रुपए घटकर 52.28 रुपए प्रति लीटर हो गया है। हालांकि, फरवरी 2015 में डीजल 46.01 रुपए प्रति लीटर तक सस्ता हो गया था।

शेयर बाजार को लगे पंख

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मोदी का एक साल का समय शेयर बाजार के लिए अच्छे दिन जैसा ही था। पिछले एक साल में अगर सिर्फ सेंसेक्स की बात की जाए तो करीब 19 फीसदी की बढ़त देखी गई है। 4 मार्च 2015 को तो शेयर बाजार ने 30,000 का जादुई आंकड़ा पार करते हुए 30,024 के उच्चतम स्तर को छू लिया।

मार्केट के दिग्गज शेयरों में करीब 76 फीसदी तक का रिटर्न मिला है, जिसमें मारुति सुजुकी, सिपला, एक्सिस बैंक और हिंदुस्तान यूनिलीवर हैं। वहीं दूसरी ओर अगर बात एफआईआई की करें तो उनकी ओर से भारते के पूंजी बाजार में करीब 2,73,960 करोड़ रुपए का तगड़ा निवेश किया गया है।

ऐसे में अगर मोदी की अब तक की पॉलिसी से शेयर मार्केट पर पड़ने वाले प्रभाव की बात करें, तो इसे शेयर बाजार के अच्छे दिन ही कहेंगे। हालांकि, अब सेंसेक्स करीब 3000 तक गिरकर 27,000 के स्तर के करीब आ चुका है।

आयात-निर्यात पर असर

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ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के अनुसार पिछले साल मई में भारत का कुल एक्सपोर्ट 28,000 मिलियन ड़ॉलर था, जो मई मार्च 2015 तक घटकर 22050 मिलियन डॉलर रह गया है। किसी भी इकोनॉमी के लिए निर्यात का कम होना अच्छा नहीं होता है।

वहीं दूसरी ओर, मई 2014 में आयात 39,233 मिलियन डॉलर था, जो इस साल मार्च अंत तक घटकर 33,050 मिलियन डॉलर हो गया है। देश का आयात कम होना देश के लिए अच्छा होता है।

आपको बता दें कि किसी वस्तु को आयात करने पर देश का विदेशी मुद्रा भंडार कम होता है, जबकि निर्यात करने पर यह बढ़ता है। ऐसे में अगर किसी देश का आयात कम है, और निर्यात अधिक है, तो उस देश का विदशी मुद्रा भंडार बढ़ता है, जो देश की इकोनॉमी को मजबूत करता है।

इन योजनाओं से इकोनॉमी को मिलेगा बूस्ट

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पिछले एक साल में मोदी ने कई ऐसी योजनाएं शुरू की हैं जो इकोनॉमी को बूस्ट देने का काम करेंगी। मोदी ने सब्सिडी ट्रांसफर की योजना को शुरू करके एलपीजी की कालाबाजारी पर काफी हद तक लगाम भी लगा दी है। पहले होने वाली कालाबाजारी से सबसे अधिक परेशानी गरीबों को ही होती थी।

मोदी सरकार ने पेंशन और बीमा योजनाएं शुरू की हैं, जिनसे रूरल इकोनॉमी को काफी बूस्ट मिलेगा। इन योजनाओं में 1 रुपए प्रतिमाह में 2 लाख का बीमा जैसी योजनाएं भी शामिल हैं, जिनसे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब किसानों को फायदा मिलेगा।

मोदी सरकार ने हाल ही में मु्द्रा बैंक भी शुरू किया है, जिसके तहत छोटे उद्यमियों को 10 लाख रुपए तक का ऋण दिया जाएगा। ऐसे में ये योजना न सिर्फ रोजगार के अवसर पैदा करेगी, बल्कि तमाम परेशानियां झेलने वाले किसानों को खेती के साथ-साथ कुछ और काम भी करने की सुविधा देगी। ऐसे में अगर बेमौसम किसी किसान की फसल बर्बाद होगी तो उसे आत्महत्या करने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि उसके पास रोजी-रोटी के लिए दूसरा काम भी होगा।

मोदी ने गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम भी शुरू करने की बात कही है, जिसके तहत मंदिरों के सोने का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे मंदिरों में बेकार पड़ा सोना सरकार के पास आकर मंदिरों को उस पर ब्याज कमाने की सुविधा तो देगा ही, साथ ही इससे सोने के आयात में भी कमी आएगी।

किसानों की उम्मीदें पड़ीं धुंधली

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मोदी सरकार का एक साल का समय भले ही अनेकों देशों की यात्राओं से भरा रहा हो। भले ही इन दौरों में मोदी ने कई सारे एग्रीमेंट किए हों। लेकिन विदेशी यात्राओं की इस चकाचौंध में किसानों की उम्मीदें मानों धुंधली पड़ गई हों।

एक ओर बेमौसम बरसात ने किसानों की फसलों को बर्बाद कर दिया और सैकड़ों किसानों ने आत्महत्या कर ली। वहीं दूसरी ओर मोदी सरकार लैंड एक्विजिशन बिल को पास कराने की जद्दोजहद में जुट गई।

किसान के खेत का सारा अनाज बर्बाद हो गया। ऐसी स्थिति में उसे उचित मुआवजा मिलना चाहिए था। किसान के पास ले देकर बची थी तो सिर्फ जमीन, उसके लिए भी मोदी सरकार लैंड एक्विजिशन बिल लेकर आ गई।

दरअसल, किसानों के मन में मोदी सरकार के लिए बेमौसम बरसात के कारण उचित मुआवजा न मिलने से पहले से ही गुस्सा भरा था, लैंड एक्विजिशन बिल ने मानो आग में घी का काम कर दिया।

कारोबार जगत के लोगों ने क्या कहा

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बैंकिंग क्षेत्र की प्रमुख हस्ती और एचडीएफसी के प्रमुख दीपक पारेख ने मोदी के कामों से जमीनी स्तर पर कोई बदलाव न होने की बात कही थी और कहा था कि इससे कारोबारी अधीर हो रहे हैं।

उद्योगपति राहुल बजाज ने मोदी के मेक इन इंडिया की खूब तारीफ की है। उन्होंने कहा है कि मेक इन इंडिया से न केवल देश में रोजगार के अवसर पैदा होंगे, बल्कि दश का निर्यात बढ़ने से विदेशी मुद्रा भंडार में भी बढ़ोत्तरी होगी।

सिंगापुर के कमोडिटी गुरु और हेज फंड मैनेजर जिम रोजर्स ने मोदी को सिर्फ बातें बनाने वाला कहा। उन्होंने कहा कि मोदी अभी तक ऐसी कोई योजना नहीं ला पाए हैं, जो विदेशी निवेशकों को लुभा सके।

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