फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   How long will life on earth?

और जब पृथ्वी से खत्म हो जाएगा जीवन

Sun, 04 Oct 2015 04:33 PM IST
Updated Sun, 04 Oct 2015 04:33 PM IST
विज्ञापन
How long will life on earth?

हम आप जो भी चीज देख रहे हैं, उसका अतीत बन जाना तय है। पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व भी इसमें शामिल है। एक दिन ये भी अतीत बन जाएगा। लेकिन कब?

विज्ञापन


आपको भले यकीन ना हो, लेकिन जीवाश्मों के अध्ययन के मुताबिक पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व को करीब 3.5 अरब साल हो चुके हैं। इतने समय में पृथ्वी ने कई तरह की आपदाएं झेली हैं - जम जाना या अंतरिक्ष की चट्टानों का टकराना, प्राणियों में बड़े पैमाने पर जहर का फैलना, जला कर सब कुछ राख कर देने वाली रेडिएशन....जाहिर है यदि जीवन को ऐसा भीषण खतरा पैदा हो तब भी पृथ्वी से पूरी तरह से जीवन का अस्तित्व खत्म नहीं हो पाएगा।
विज्ञापन


लेकिन इस दुनिया के खत्म होने की आशंका और खतरों का विचार रहता ही है। लेकिन हो क्या सकता है? कब तक रहेगा पृथ्वी पर जीवन? पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व से जुड़ी संभावनाओं और आशंकाओं पर एक नजर:

विज्ञापन
विज्ञापन

ज्वालामुखी से तबाही

How long will life on earth?

संभव है कि पृथ्वी पर जीवन ज्वालामुखियों के विस्फोट से 25 करोड़ साल में खत्म हो जाएगा। ऐसा होने पर पृथ्वी पर मौजूद 85 फीसदी जीव नष्ट हो जाएंगे।

जबकि 95 फीसदी समुद्री जीवों का अस्तित्व नष्ट हो जाएगा।इस दौरान ज्वालामुखी से जो लावा निकलेगा, वो ब्रिटेन के आकार से आठ गुना बड़ा होगा। लेकिन जीवन अपने आप गायब नहीं होगा।

क्षुद्र ग्रह के टकराने का खतरा

How long will life on earth?

समय सीमा – शायद, 45 करोड़ साल में। ये सामान्य जानकारी है कि पृथ्वी पर से डायनासोर प्रजाति का क्षुद्र ग्रहों के टकराने के कारण अंत हुआ था। अगर एक भारी-भरकम क्षुद्र ग्रह के टकराने से विशालकाय डायनासोर लुप्त हो सकते हैं तो फिर एक दूसरी टक्कर से पृथ्वी पर जीवन भी नष्ट हो सकता है?

हालांकि ये काफी हद तक इस पर निर्भर करेगा कि क्षुद्र ग्रह टकराता कहां है? कुछ बड़े क्षुद्र ग्रह पृथ्वी से टकराए जरूर हैं लेकिन उससे पृथ्वी पर जीवन खत्म नहीं हुआ।

डायनासोर को नष्ट करने वाले क्षुद्र ग्रह जितने बड़े आकाशीय पिंड से पृथ्वी का टकराना दुर्लभ उदाहरण है।इतने बड़े आकाशीय पिंड पृथ्वी से 50 करोड़ साल के अंतराल पर ही टकराते रहे हैं।

अगर क्षुद्र ग्रह पृथ्वी से टकराया भी तो पृथ्वी पर से जीवन पूरी तरह समाप्त नहीं होगा। हालांकि इसकी आशंका तब ज्यादा होगी जब कोई ग्रह आकार का पिंड पृथ्वी से टकरा जाए।

जब पृथ्वी का केंद्र जम जाएगा

How long will life on earth?

समय सीमा- तीन से चार अरब साल

पृथ्वी का केंद्र जमने से भी जीवन पूरी तरह खत्म हो सकता है। इस विषय पर 2003 में हॉलीवुड में 'द कोर' नाम से फ़िल्म बन चुकी है।इस फिल्म की कहानी है- पृथ्वी का केंद्र रोटेट करना बंद कर देता है, तब अमरीकी सरकार पृथ्वी के केंद्र तक ड्रिलिंग करके रोटेशन को सही करने की कोशिश करती है।

एक्टिव कोर नहीं होने से पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र खत्म हो जाएगा और इससे पृथ्वी का पूरा जीवन खतरे में आ सकता है।कभी मंगल के पास अपना चुंबकीय क्षेत्र होता था जिसे उसने खो दिया। पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के कमजोर होने की खबरें भी पिछले दिनों आती रही हैं।

लेकिन इसमें चिंता करने की कोई बात नहीं हैं क्योंकि ये कमी दिशा बदलने के चलते हुई है, घट नहीं रही है। लाखों साल में ऐसा अंतर आता रहता है।

बड़ा सवाल ये है कि क्या पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र पूरी तरह गायब हो जाएगा। केंब्रिज यूनिवर्सिटी के रिचर्ड हैरिसन के मुताबिक हाल फिलहाल इसकी कोई उम्मीद नहीं है।

गामा किरणों का विस्फोट

How long will life on earth?

बाइनरी स्टार को डब्ल्यूआर 104 भी कहते हैं। यह करीब पांच लाख साल में तैयार होता है। अगर ऐसा हुआ भी तो हम तब तक नहीं

होंगे।वैसे क्या हम यूनिवर्स में अकेले हैं। अगर नहीं तो हम एलियन की सभ्यता से संपर्क क्यों नहीं साध पाए हैं? वैसे पृथ्वी पर जीवन का समापन गामा किरणों के विस्फोट से हो सकता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ बार्सीलोना के राउल जेमेनेज कहते हैं, "अगर गामा किरणों में विस्फोट हुआ तो फिर पृथ्वी पर से पूरी तरह जीवन समाप्त हो जाएगा।

अगर पृथ्वी किसी तरह से आकाश गंगा के केंद्र के करीब पहुंच जाती है तो पृथ्वी पर से जीवन नष्ट हो सकता है।"इलिनोसिस के बाटविया के फर्मीलैब के जेम्स एनिस के मुताबिक अगर गामा रे विकिरण पृथ्वी से टकराती हैं तो भी जीवन पूरी तरह से समाप्त नहीं होगा,

क्योंकि समुद्री जल रेडिएशन को सोखने के लिए बेहतर विकल्प हैं। हालांकि पृथ्वी से इंसानों का नामो निशान मिट जाएगा, लेकिन दूसरे जीव जंतु बचे रहेंगे।

वांडरिंग स्टार्स

How long will life on earth?

समय सीमा- अगले एक लाख साल में संभव

अरबों साल से हमारा ग्रह सूर्य के इर्द-गिर्द चक्कर लग रहा है। लेकिन अगर कोई तारा नजदीक आ जाए तो क्या होगा। न्यूयार्क की रॉचेस्टर यूनिवर्सिटी के एरिक मामेजक के नेतृत्व में फरवरी, 2015 में हुए अध्ययनों में बताया गया है कि ऐसा संभव है और ये भी कहा गया है कि ये जल्दी हो सकता है।

जर्मनी के मैक्स प्लांक इंस्टीच्यूट फॉर एस्ट्रोनॉमी के कोरयान बेलर जोंस ने इस बात को रेखांकित किया कि दो तारे समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं।

एचआईपी 85605 हमारे इतने पड़ोस में है कि वो 2.4 लाख साल से 4.7 लाख साल के बीच में पृथ्वी तक पहुंच सकता है। जीएल 710 के भी 13 लाख सालों में पृथ्वी के करीब पहुंचने की आशंका है।

मामेजक के मुताबिक जीएल 710 बड़ा तारा है और हिप 85605 भी। तो क्या इनसे पृथ्वी के जीवन को ख़तरा होगा।ऐसे तारे सौरमंडल के अंदर आने पर खतरनाक हो सकते हैं।

लेकिन इसकी आशंका भी बेहद कम हैं। बायलर-जोंस के मुताबिक, "किसी बाहरी तारे के पृथ्वी के आंतरिक सोलर सिस्टम में पहुंचने की संभावना नहीं के बराबर है।"

किसी और चीज से नहीं जीवन से खतरा

How long will life on earth?

समय सीमा- 50 करोड़ साल

सिएटल स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ़ वाशिंगटन के पीटर वार्ड के मुताबिक जीवन को सबसे ज़्यादा ख़तरा ख़ुद से ही है। करीब 2।3 अरब साल पहले वायुमंडल में काफी ऑक्सीजन का प्रवेश फोटोसिंथेटिक लाइफ के चलते हुआ। ऑक्सीजन की इतनी मात्रा के चलते काफी जीवन नष्ट हो गया।

वार्ड के मुताबिक सूर्य गर्म हो रहा है और पृथ्वी का तापमान भी बढ़ रहा है। इसके चलते पठार और वायुमंडल के कार्बन डाई ऑक्साइड के बीच केमिकल रिएक्शन भी बढ़ रहा है। कार्बन डाई डॉक्साइड के कम होने से पौधे फोटोसिंथेसिस नहीं कर पाएंगे। पौधों को खत्म होने से जीवन भी खत्म हो जाएगा।

सूर्य का फैलना

How long will life on earth?

समय सीमा- 1 से 7.5 अरब साल

अगर ऊपर की आशंकाएं निर्मूल साबित हुईं तो सूर्य के चलते जीवन समाप्त होगा। सूर्य ही पृथ्वी पर जीवन की ऊर्जा के तौर पर प्रकाश भेजता है, लेकिन हमेशा उसका रिश्ता दोस्ताना नहीं रहने वाला है।

हमने देखा है कि सूर्य लगातार गर्म हो रहा है। एक समय ऐसा आएगा कि पृथ्वी के समुद्र सूख जाएंगे। ग्रीन हाउस इफेक्ट के चलते तापमान भी बढ़ेगा। ये एक सब एक अरब साल में शुरू हो जाएगा।

लेकिन यहीं सब कुछ खत्म नहीं होगा। अब से ठीक पांच अरब साल बाद सूर्य फैलना शुरू करेगा। एक सूजे हुए तारे की शक्ल में यह 7.5 अरब साल में पृथ्वी को निगल लेगा।

हालांकि उम्मीद है कि पृथ्वी तब भी बची रह सकती है क्योंकि सूर्य के फैलने से उसका वजन कम होगा, ऐसे में पृथ्वी का हिस्सा सूर्य की चपेट में आने से बच सकता है। लेकिन 2008 के एक अनुमान के मुताबिक इसके बावजूद पृथ्वी का अस्तित्व नहीं बचेगा।

अगर ऐसा हुआ तो इससे बचने का एक ही रास्ता होगा, हमारे पास ऐसी तकनीक हो जिससे हम पृथ्वी को सुरक्षित सूर्य की चपेट में आने से दूर ले जाएं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो पृथ्वी का अधिकतम जीवन 7.5 अरब साल ही होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed