{"_id":"f017c69a-2aa6-11e2-9941-d4ae52bc57c2","slug":"how-kejriwal-expose-corruption","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैसे करते हैं केजरीवाल भ्रष्टाचार का खुलासा","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
कैसे करते हैं केजरीवाल भ्रष्टाचार का खुलासा
नोएडा/विजय जैन
Updated Sat, 10 Nov 2012 10:51 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अरविंद केजरीवाल जब भी भ्रष्टाचार को लेकर नया खुलासा करने की बात करते हैं तो तमाम सियासी हलकों में हड़कंप मच जाता है। मीडिया की मुख्य खबर यही होती है। लोगों की निगाह केजरीवाल के खुलासे पर होती है। गोपनीयता इतनी कि केजरीवाल के बोलने से पहले तक किसी को ये पता नहीं चल पाता कि वे आज किसके खिलाफ बोलने जा रहे हैं।
विज्ञापन
केजरीवाल के इस पोल खोल अभियान के निशाने पर तमाम सियासी नेता और उद्योगपति आ चुके हैं लेकिन हर बार यही सोच कि 'इस बार निशाने पर कौन होगा', इसे लेकर कयास लगाए जाते हैं। हम आपको बताते हैं कि केजरीवाल और उनकी टीम भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे इस आंदोलन को कैसे ऑपरेट करती है। एक एक खुलासा पर काफी दिन तक ग्राउंड वर्क किया जाता है।
विज्ञापन
दिल्ली-गाजियाबाद सीमा पर स्थित कौशांबी में मौजूद मकान ए-119 में इंडिया अगेंस्ट करप्शन का दफ्तर है। इस इमारत के दो फ्लोर को अरविंद केजरीवाल की संस्था 'परिवर्तन' ने किराए पर ले रखा है। इन्हीं दो फ्लोर से पूरा आंदोलन चलता है।
विज्ञापन
केजरीवाल द्वारा चलाए जा रहे इंडिया अगेंस्ट करप्शन के धड़े में दिल्ली में 10-15 कर्मचारी हैं, जो सैलरी पर काम करते हैं, जबकि करीब 1200 स्वयंसेवक हैं जो आंदोलन की गतिविधियों में लगे रहते हैं। केजरीवाल ने जहां पूरी तरह से दिल्ली की कमान संभाल रखी है वहीं उनके साथ पिछले 13 साल से जुड़े मनीष सिसौदिया अन्य राज्यों में स्वयंसेवक खड़े करने में जुटे हुए हैं। केजरीवाल को उम्मीद है कि जल्द ही और स्वयंसेवक उनके साथ जुड़ेंगे।
गांधी परिवार के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी पर आरोप लगाने के बाद से ही आईएसी के दफ्तर में देशभर से फाइलें और रिपोर्टें आ रही हैं। जब टीम केजरीवाल को लगता है कि आरोपों में दम है तो वो उसे अपनी रिसर्च टीम (जिसमें अलग अलग पेशे से जुड़े कई विशेषज्ञ शामिल हैं) के पास भेजते हैं, जो आरोपों की पहले खुद जांच करती है। पूरे सबूत जुटाने के बाद ही प्रेस काफ्रेंस करके सबके सामने दस्तावेज लाए जाते हैं।
यही नहीं पिछले मुद्दे की मीडिया कवरेज का भी आकलन किया जाता है। आरोपों में भ्रष्टाचार के स्तर से ज्यादा अहमियत लोगों को जोड़ने की क्षमता को दी जाती है। उदाहरण के तौर पर केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद पर लगाए गए आरोप सिर्फ 71 लाख रुपये के भ्रष्टाचार के थे लेकिन इन आरोपों ने विकलांगों को अरविंद केजरीवाल से जोड़ दिया। वहीं भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी और सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर किसानों की जमीन हड़पने के आरोप लगाकर अरविंद केजरीवाल ने किसानों का दिल जीतने की कोशिश की।
कोई भी मुद्दा उठाने से पहले अरविंद केजरीवाल इस बात का पूरा आकलन करते हैं कि इस पर जनता और नेताओं की प्रतिक्रिया कैसी होगी। नेताओं की प्रतिक्रिया का जवाब भी वे पहले से ही तैयार कर लेते हैं ताकि 'मौके पर चौका' मारा जा सके।
केजरीवाल ने भले ही पार्टी बनाने की घोषणा कर दी हो, लेकिन उनके दफ्तर में 'पार्टी' से ज्यादा 'आंदोलन' शब्द सुनाई देता है। आईएसी में मीडिया पर नजर रखने, केजरीवाल को मिल रही कवरेज का आकलन करने और हॉट टॉपिक्स की सूची तैयार करने के लिए मीडिया सेल काम करता है।
आईएसी के सभी वरिष्ठ सदस्यों को यह मीडिया सेल अलर्ट भी भेजता है। सभी सदस्य एक ब्लैकबेरी बीबीएम ग्रुप के जरिए जुड़े हैं। मीडिया का ध्यान अपनी तरफ बनाए रखने के लिए एक बार में एक ही मुद्दा उठाया जाता है।