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भारत के लिए कितनी है इसराइल की अहमियत?

Mon, 18 Jan 2016 06:04 PM IST
संदीप सोनी/ बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
संदीप सोनी/ बीबीसी संवाददाता, दिल्ली Updated Mon, 18 Jan 2016 06:04 PM IST
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How important is Israel for India?

एनडीए सरकार पश्चिम एशिया और खाड़ी के क्षेत्र में इसराइल को बहुत महत्व देती है। ये कहना है जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पश्चिम एशिया मामलों के जानकार प्रोफेसर आफताब कमाल पाशा का।

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प्रोफेसर कमाल पाशा ने बीबीसी को बताया कि डेढ़ साल के अंदर गृहमंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की इसराइल यात्रा से साफ है कि एनडीए सरकार की इसराइल नीति यूपीए सरकार से काफी अलग है। प्रोफेसर पाशा ने कहा कि इस साल इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के भारत आने की भी उम्मीद है।
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उनका कहना है कि 'जनसंघ' पार्टी जब जनता सरकार (1977) में शामिल हुई थी, तभी से वो इसराइल के साथ गहरे संबंध बनाने की बात करती थी। उनके मुताबिक बाद में अटल बिहारी वाजपयी सरकार ने सितंबर 2003 में पूरी दुनिया में अलोकप्रिय इसराइल के तत्कालीन प्रधानमंत्री एरियल शेरॉन को भारत बुलाया था।
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प्रोफेसर पाशा के मुताबिक पिछली यूपीए सरकार के दौरान ही सुरक्षा और कृषि जैसे मुद्दों पर इसराइल के साथ संबंध आगे बढ़ रहे थे, लेकिन वह सरकार इसका ज्यादा प्रचार नहीं करती थी। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार एक संतुलित रवैया अपनाकर चल रही थी और वह ईरान, तुर्की या बाकी अरब देशों के साथ भी अच्छे संबंध बनाकर रखना चाहती थी।

अन्य मित्रों के साथ भी इसराइल जैसा करें

How important is Israel for India?

प्रोफेसर पाशा मानते हैं कि भारत और इसराइल के बीच जिस तरह से दौरे हो रहे हैं, वैसा भारत को दूसरे मित्र देशों के साथ भी करना चाहिए, जो कि नहीं हो रहा है।

उनका कहना है कि भारत और इसराइल के बीच ऊर्जा जरूरतों, रक्षा, तकनीक और बाकी मुद्दों पर कई समझौते हुए हैं, और भारत जानना चाहता है कि सुषमा स्वराज के दौरे से वह और क्या हासिल कर सकता है। कमाल पाशा के मुताबिक इसराइल बेहतर तकनीक के लिए जाना जाता है और भारत में पानी की कमी या जल निकासी जैसी कई समस्याएं है, जिसमें इसराइल मदद कर सकता है।

प्रोफेसर कमाल पाशा मानते हैं कि इसराइल भी भारत को एक महत्वपूर्ण देश के रूप में देखता है। परमाणु शक्ति होने के कारण इसराइल भारत को बहुत महत्व देता है। इसके अलावा अरब देशों के साथ भारत के अच्छे संबंध हैं और इसराइल चाहता है कि ज्यादा से ज्यादा अरब देश उसे मान्यता दें।

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