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चींटियां ऐसे करती हैं अपना इलाज

Fri, 04 Sep 2015 06:21 PM IST
Updated Fri, 04 Sep 2015 06:21 PM IST
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How do treatment ants

कुछ ऐसी चींटियां हैं जो अपना इलाज खुद करती हैं। जब वे संक्रमण महसूस करती हैं तो खुद ही दवा की उचित डोज़ ले लेती हैं। हां, ऐसा नहीं होता कि ये दवा उन्हें साफ सुथरी केमिस्ट शॉप से मिले। दरअसल संक्रमित होने के बाद चींटियां सड़े हुए जानवरों के अवशेषों या पौधों पर मौजूद कीड़ों को खाती है।

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ये चींटियां यानी फोरमिका फूस्का जमीन या फिर पहाड़ी के अंदर रहती हैं। उनके आस पड़ोस में ख़ासा ख़तरनाक फंगस मौजूद होता है जिससे चींटियां भी संक्रमित हो जाती हैं।
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इन फंगस से ऐसी एंजाइमस निकलती हैं जो धीरे धीरे कर चींटियों के शरीर के जूस को खाने लगती हैं और यदि ये चलता रहे तो 10 दिनों में चींटी की मौत हो सकती है। अब तक ये माना जाता था कि संक्रमित चींटियां ख़ुद को असहाय पाती हैं, लेकिन हाल के एक अध्ययन के मुताबिक ऐसा नहीं है।

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गंध से पहचान

How do treatment ants

फिनलैंड की 'यूनिवर्सिटी ऑफ हेलसिंकी' में निक बोस और उनके साथियों ने अपने अध्ययन में पाया कि जब चींटियां संक्रमित होती हैं तो वो अपना इलाज ख़ुद ही कर लेती हैं।

प्रयोगशाला में ये देखा गया कि फंगस से संक्रमित होने के बाद चींटियां सड़-गल रही चीज़ों, पौधों या फिर ऐसे ही 'हानिकारक' पदार्थों को खाती हैं, जो उनके शरीर में मौजूद फंगस को खत्म कर देता है और चींटियों की जीवनरक्षा करता है।

चींटियां ऐसे हानिकारक भोजन को गंध से पहचान लेती हैं और बोस के मुताबिक इसमें अचरज की कोई बात नहीं है। वे कहते हैं, "उनमें गंध पहचानने की अद्भुत क्षमता होती है। वे अलग अलग पदार्थों को उनकी गंध से पहचानती हैं।"

इस तरह से स्व उपचार की प्रक्रिया दूसरे जीवों में भी देखी गई है। यह पक्षियों, छिपकलियों और मधुमक्खियों में भी देखा गया है। ऐसा देखा गया है कि ये सब भी संक्रमित होने पर हानिकारक पदार्थों को खाकर संक्रमण को ख़त्म करने की कोशिश करते हैं।

शोध से पता चला

How do treatment ants

दरअसल चींटियां रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीसिज (आरओएस) की मदद से ऐसा करती हैं। आरओएस के कणों में ऑक्सीजन होता है जो किसी भी संक्रमण को खत्म कर सकता है। कुछ जीवों में ये ख़ुद से उत्पन्न होता है जबकि कुछ इसे अपने भोजन से हासिल करते हैं।

इसकी पड़ताल के लिए बोस और उनके साथियों ने चींटियों को दो समूह में बांट दिया और उनमें कुछ संक्रमण की शिकार चींटियां थीं। कुछ चींटियां सामान्य शहद वाला भोजन लेती हैं लेकिन जबकि चार फीसदी हाइड्रोजन पेरॉक्साइड (एच2ओ2) वाला भोजन खा रही थीं, जिनमें आरओएस मौजूद है।

हालांकि इसमें ख़तरे भी हैं। एच2ओ2 जहरीला होता है इसलिए काफ़ी हानिकारक हो सकता है। गैर संक्रमित चींटियां हाइड्रोज़न पेरॉक्साइड का भोजन कर लें तो उनकी मौत भी हो सकती है।

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