{"_id":"e1f5b11a-72c4-11e2-8c5e-d4ae52bc57c2","slug":"how-bjp-attack-government-on-terrorism","type":"story","status":"publish","title_hn":"आतंकवाद पर सरकार को कैसे घेरेगी भाजपा","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
आतंकवाद पर सरकार को कैसे घेरेगी भाजपा
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा
Updated Sat, 09 Feb 2013 07:57 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संसद के शीतकालीन सत्र से पहले अजमल कसाब और अब बजट सत्र से ठीक पहले आतंकी अफजल गुरू को फांसी के फंदे तक पहुंचा कर यूपीए सरकार ने भाजपा से आतंकवाद का मुद्दा छीनने की पूरी कवायद कर ली है।
विज्ञापन
यूपीए सरकार पर आतंकवाद को लेकर नरम रुख अपनाने का आरोप लगाने वाली भाजपा भी मान रही है कि फिलहाल सरकार का पलड़ा भारी हो गया है। इसलिए पार्टी के लिए अब पाक समर्थित आतंक और हिंदू आतंक पर सरकार को घेरना बड़ी चुनौती है।
विज्ञापन
भाजपा को आशंका है कि आतंकवाद के खिलाफ अपने को और कठोर व सामाजिक तौर पर संतुलित दिखाने के लिए सरकार अब हिंदू आतंक के मुद्दे को और हवा दे सकती है। हालांकि यह स्थिति भाजपा व कांग्रेस, दोनों को अपना-अपना वोट बैंक मजबूत करने में सहायक साबित हो सकती हैं।
विज्ञापन
गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे पहले ही इस मुद्दे को उछाल चुके हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में हिंदू आतंक के मुद्दे पर सरकार और भाजपा आमने-सामने होंगे। वैसे भी भाजपा सड़क से लेकर संसद तक शिंदे का विरोध करने का पहले ही ऐलान कर चुकी है।
कसाब और अफजल को फांसी देने के बाद अब भाजपा को अब समय से पहले लोकसभा चुनाव की आहट भी सुनाई देने लगी है। पार्टी को यह भी आशंका है कि सरकार इस तरह के अन्य भावनात्मक मुद्दों पर भी बड़े फैसले ले सकती है। इससे कांग्रेस को राजनीतिक लाभ होगा। हालांकि भाजपा अब इस फैसले पर अमल करने में हुई देरी के मसले पर सरकार से जवाब तलब करने लगी है।
पार्टी नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार को साफ करना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अमल करने में इतनी देर क्यों हुई। इस मांग के बावजूद भाजपा को भी इस सवाल पर सरकार को कटघरे में खड़ा कर पाने की संभावना नहीं दिख रही है।
पार्टी के एक नेता का कहना था कि चुनाव के मैदान में विकास, भ्रष्टाचार की बजाए भावनात्मक मुद्दे ज्यादा कारगर संबित होते हैं। कसाब और अफजल के मामले में अब सरकार को घेरने का मुद्दा अब खत्म हो गया है, क्योंकि पार्टी लंबे समय से मांग करती रही है कि संसद पर आतंकी हमलों के दोषी अफजल गुरु को फांसी की सजा पर अमल किया जाए।
देर से ही सही पर न्याय मिला: विपक्ष
संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरू को फांसी दिए जाने के फैसले को देश के सभी राजनीतिक दलों ने सही ठहराया है। प्रमुख विपक्षी दल भाजपा, जदयू, वामदल, कांग्रेस सहित क्षेत्रीय पार्टियों ने फैसले का स्वागत किया है। हालांकि भाजपा ने इसे देर से उठाया गया सही कदम बताया, वहीं कांग्रेस ने अपनी सफाई में कहा कि कानून ने अपना काम किया है। इस मामले को राजनीतिक रूप नहीं दिया जाना चाहिए।
भाजपा ने इसे जनता के बढ़ते दबाव में राष्ट्रहित में किया गया फैसला बताया है। हालांकि न्याय में हुई देरी के लिए राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि सरकार यह समझा पाने में विफल रही है कि संसद पर हमले के दोषी को फांसी दिए जाने में देर क्यों हुई। लेकिन देर से ही सही शहीदों को न्याय मिला है।
भाजपा उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि देश के खिलाफ युद्ध का षड्यंत्र और लोकतंत्र के मंदिर पर हमले के गुनहगार को फांसी देने के फैसले में देरी के बावजूद देश ने राहत की सांस ली है। इस फैसले से आतंकियों और देशद्रोहियों को कड़ा संदेश गया है।
जदयू अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि देर से ही सही लेकिन राष्ट्रहित में किए गए इस फैसले से संसद पर हमले के शहीदों को न्याय मिला है। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि विलंब हुआ मगर इस बात की खुशी है कि न्यायिक प्रक्रिया का पालन किया गया। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव अतुल अंजान ने भी इस फैसले का स्वागत किया।
वहीं केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने संविधान के अनुच्छेद-72 का हवाला देते हुए कहा कि इसके तहत कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के दया याचिका खारिज कर दिए जाने पर कानून ने अपने तरीके से काम किया। कांग्रेस प्रवक्ता संदीप दीक्षित ने कहा कि इस दुस्साहसी हमले के मामले में न्याय किया गया है।