'गृहिणियों की हैसियत घर के कमाऊ सदस्य जैसी'

इलाहाबाद/ब्यूरो Updated Tue, 27 Nov 2012 12:46 AM IST
housewives are like earning member of house said high court
गृहिणियां भले ही पैसे नहीं कमा रही हों पर उनकी हैसियत परिवार के कमाऊ सदस्य जैसी ही है। परिवार के लिए दी जा रही उनकी सेवा को देखते हुए गृहिणियों की दैनिक आमदनी सौ रुपये के हिसाब से तीन हजार रुपये महीना होती है। हाईकोर्ट ने यह व्यवस्था दुघर्टना में हुई गृहिणी की मौत के बाद परिवार को मिलने वाले मुआवजे पर विचार करते हुए दी है।

अदालत ने कहा कि दुघर्टना बीमा का निस्तारण करते समय यह नहीं कहा जा सकता कि गृहिणी घर की कमाऊ सदस्य नहीं थी इसलिए उसे कमाऊ सदस्य की तरह मुआवजा पाने का हक नहीं है। इस मामले पर विचार करते हुए न्यायमूर्ति सुनील अंबवानी और न्यायमूर्ति एएन मित्तल की खंडपीठ ने अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश महराजगंज द्वारा तय किए गए मुआवजे को सही ठहराया है।

सत्र न्यायालय के निर्णय को रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने चुनौती दी थी। महराजगंज जिले के भरवलिया नौका टोला निवासी सफीदा खातून की 23 फरवरी 2011 को दुघर्टना में मृत्यु हो गई थी। दुघर्टना चालक की लापरवाही से हुई थी। उसके वारिसों ने दावा दाखिल किया। जिसे स्वीकार करते हुए सत्र न्यायालय ने दो लाख 64 हजार रुपये मुआवजा और दो हजार रुपये अंतिम संस्कार के लिए स्वीकृत किया। 2500 रुपये संपत्ति की क्षति के तौर पर दिए।

याची कंपनी का कहना था कि मृतका कमाऊ सदस्य नहीं थी। उसके चार बालिग लड़के हैं जिनकी स्वतंत्र आमदनी है। खंडपीठ का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक गैर कमाऊ सदस्य की मानद आमदनी 15000 रुपये वार्षिक है। ऐसी स्थिति गृहिणी की आय को सौ रुपये प्रतिदिन तय करना गलत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के सरला वर्मा केस का फैसला गृहिणियों पर भी लागू होगा।

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