26/11 हमलाः होटल मैनेजर की बहादुरी के आगे सब ढेर

योगेश नारायण दीक्षित/अमर उजाला दिल्ली Updated Tue, 26 Nov 2013 06:23 PM IST
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पांच बरस पहले मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले के दौरान कई लोगों ने अपनी जान पर खेलकर दूसरों की सांसें बटोरने वाले लोगों की फेहरिस्त कम लंबी नहीं, लेकिन एक शख्स ऐसा है जो भीड़ में भी अलग दिखता है।
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किसी अपने को खोने का गम क्या होता है, इस बात से दुनिया वाकिफ है। लेकिन इस हमले में एक व्यक्ति ऐसा था, जिसने अपना पूरा परिवार खो दिया, लेकिन संयम नहीं।
जिंदगी की राह में ड्यूटी को सबसे ऊपरी पायदान पर रखने वाले होटल ताज के जनरल मैनेजर करमबीर अब दिलों में राज करते हैं।
पूरा परिवार खो दिया, लेकिन हिम्मत नहीं
आतंकी हमले में अपने दोनों लाडले बेटों और पत्नी के मारे जाने की जानकारी के बावजूद कोई शख्स कैसे अपने कर्तव्य को पूरा कर सकता है, यह करमबीर बताते हैं।

वह ड्यूटी पर मुस्तैद थे और उन मेहमानों को बचाने के लिए जी-जान से जुटे रहे, जिनकी सेवा और सुरक्षा की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी।

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अपनों को खोने का गम, दूसरों को बचाने के जुनून पर भारी न पड़ सका। अपने अदम्य साहस के दम पर देश भर में तारीफ बटोरने वाले करमबीर के चर्चे सात समंदर पार तक हैं।

प्रतिष्ठित हार्वर्ड बिजिनेस स्कूल में एक रिसर्च जारी है और इस केस स्टडी के नायक हैं मोहाली के जांबाज करमबीर सिंह।

फौजी पिता से सीखा नेतृत्व का गुण
होटल प्रबंधन कौशल में बड़ी शख्सियत माने जाने वाले करमबीर मुंबई हादसे के बाद मोहाली स्थित अपने पिंड जगतपुरा आ गए थे।

उनसे जब उन पलों के बारे में पूछा गया कि जब बेटे-पत्नी खोने के बाद भी काम करते रहे, इस पर उन्होंने कहा कि फौजी अफसर की संतान होने के नाते बहादुरी तो खून में है।

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उन्होंने कहा, "पिता ने सिखाया है कि जहाज के कप्तान की तरह कभी भी अपने मातहत और मेहमान को मंझधार में छोड़कर नहीं भागना चाहिए।"

करमबीर के पिता जगतार सिंह कंग आर्मी में मेजर जनरल रहे हैं। कंग की बहादुरी को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भी सलाम कर चुके हैं और उनसे खास तौर से होटल ताज में मिले थे।
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