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सांसद बोले, समलैंगिकता और भांग देश में हो लीगल

Fri, 07 Aug 2015 03:33 PM IST
Updated Fri, 07 Aug 2015 03:33 PM IST
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homosexuality and cannabis use would be legal said Tathagata Satpathy

अपने विवादित बयानों से सुर्खियों में रहने वाले बीजू जनता दल के नेता व उड़ीसा के सांसद तथागत सत्पथी एक बार फिर चर्चा में है। सांसद तथागत सत्पथी ने संसद में बयान दिया कि उनके हिसाब से समलैंगिकता और भांग के प्रयोग को कानूनी तौर पर लागू कर देना चाहिए।

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वहीं उन्होंने कहा कि नागरिकता आचार संहिता के तहत देश भर से पोर्न से प्रतिबंध हटा लिया जाना चाहिए। उन्होंने इन मसलों पर देश में बहस करने की सिफारिश भी की।
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सत्पथी गुरूवार को संसद में चौथे निरस्त और संशोधित बिल की चर्चा पर बोल रहे थे।लोकसभा में करीब 295 पुराने कानूनों को निरस्त करने का प्रस्ताव दिया गया।

प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बीजू सांसद तथागत सत्पथी ने धारा 77 को एक पुराना कानून करार देते हुए कहा कि समलैंगिता को कानूनी रूप देना भारत में आधुनिक समाज बनाने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाना होगा।

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'प्रतिबंध लगा सकते हैं खत्म नहीं कर सकते'

homosexuality and cannabis use would be legal said Tathagata Satpathy

हाल ही में नेट न्यू‌ट्रेलिटी पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर भी सरकार के रूख को देखा गया है।सत्पथी ने कहा कि हमने अभी देखा कि सरकार कैसे बिना किसी कारण के कुछ पोर्न साइट को प्रतिबंध कर देती है और फिर कुछ समय बाद बिना किसी कारण अपने ही आदेश को रद्द कर देती है।

वहीं पोर्न साइट को लेकर उन्होंने कहा कि 'आज ये बुरी साइट है ये पोर्न साइट है इसको लेकर हमें समर्थन नहीं करना चाहिए। लेकिन जब इस तरह का कुछ शुरू होता है तो उसका कोई अंत नहीं है। हम ज्यादा से ज्यादा प्रतिबंध लगा सकते हैं खत्म नहीं कर सकते हैं।

'शराब पर प्रतिबंध नहीं तो भांग पर क्यों'

homosexuality and cannabis use would be legal said Tathagata Satpathy

वहीं सत्पथी ने एनडीपीएस एक्ट के तहत भांग के प्रयोग को प्रतिबंधित करने को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र और राज्य उड़ीसा का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके यहां भांग का सतीवा नाम का एक पौधा होता है जिससे भांग निकाला जाता है।

अक्सर विशेष त्यौहार पर ही लोग इसका इस्तेमाल करते हैं, लेकिन एनडीपीएस एक्ट कानून इसे निकालना और प्रयोग करना प्रतिबंधित बनाता है।

लेकिन इसकी तुलना में शराब यानि कि एल्कोहल के प्रयोग के खिलाफ उड़ीसा में ग्रामीण महिलाओं ने इसके सेवन का विरोध किया लेकिन वहां शराब पर प्रतिबंध नहीं लगा। विरोध के बावजूद लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।इसलिए इस तरह के कानून को एक बार फिर देखने की जरूरत है।

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