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गैंगरेपः युवती के दोस्त के आरोपों की जांच शुरू
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Tue, 08 Jan 2013 11:21 PM IST
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली में दरिंदगी की शिकार हुई युवती के दोस्त के आरोपों की जांच शुरू कर दी है। इसके अलावा इस बात की भी जांच की जा रही है कि घटना में इस्तेमाल की गई बस कई बार चालान कटने के बावजूद दिल्ली की सड़कों पर कैसे चल रही थी।
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इतना ही नहीं एक महिला रिपोर्टर की ओर से 100 नंबर पर फोन करने पर दिल्ली पुलिस के उचित प्रतिक्रिया नहीं देने संबंधी खबर को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है। इन तीनों मुद्दों के अलावा इसकी भी जांच हो रही है कि सफदरजंग अस्पताल में दोनों पीड़ितों को लाए जाने के बाद वहां के कर्मचारियों ने अपने काम में कैसे और कितनी देर की।
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गृह मंत्रालय के पुलिस आधुनिकीकरण विभाग की संयुक्त सचिव वीणा कुमारी मीणा को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मीणा को इस काम के लिए सात दिन का वक्त दिया गया है। मंत्रालय ने साफ निर्देश दिया है कि इन मामलों की बारीकी से जांच कर लापरवाही की जिम्मेदारी तय की जाए।
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मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि इस जांच में दिल्ली पुलिस की कमजोरी निकल कर सामने आएगी। ऐसे में पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार को हटाए जाने की पहले से हो रही मांग को और हवा मिलेगी।
गौरतलब है कि घटना के चश्मदीद गवाह युवक ने एक टीवी चैनल पर दिए इंटरव्यू में आरोप लगाया था कि घटना के बाद उनके पास आई दिल्ली पुलिस की तीन पीसीआर वैन ने घटनास्थल किस थानाक्षेत्र में आता है, को तय करने में ही 30 मिनट से ज्यादा का समय लगा दिया था।
इसके अलावा उन्होंने बुरी तरह घायल पड़ी युवती को हाथ तक नहीं लगाया। युवती के भाई ने भी आरोप लगाया है कि सफदरजंग अस्पताल में इलाज शुरू होने में हुई देरी के चलते उसकी बहन की मौत हुई।
उधर दरिंदगी की घटना को लेकर राजधानी में शुरू विरोध प्रदर्शनों के बीच एक अंग्रेजी अखबार ने खबर छापी कि उसकी महिला रिपोर्टर द्वारा 100 नंबर पर किए गए फोन पर पुलिस ने गैर जिम्मेदाराना हरकत की। इस रिपोर्टर को एक ऑटो वाले ने धमकाया था। ऐसे में रिपोर्टर को 100 नंबर से नसीहत दी गई कि वह 109 पर फोन करें। अगर वहां से उन्हें कोई मदद नहीं मिलती तब वह 100 नंबर को फोन करें।
बस ड्राइवरों और कंडक्टरों की पहचान करनी होगी प्रदर्शित
राष्ट्रीय राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस कार्रवाई की समीक्षा के लिए बनी टास्क फोर्स ने फैसला किया है कि बस मालिकों को चालक और कंडक्टरों के फोटो और फोन नंबर बस के भीतर प्रदर्शित करने होंगे। यह नियम ऑटो रिक्शा चालकों पर भी लागू होगा।
इसके साथ इन चालकों और कंडक्टरों के गले में भी पहचान पत्र लगाना अनिवार्य किया जाएगा। टास्क फोर्स ने यह फैसला भी लिया है कि सभी बसों में जीपीएस उपकरण लगाए जाएंगे जिन पर खासतौर पर बनने वाले कंट्रोल रूम से निगरानी रखी जाएगी।
इसके अलावा परेशान महिलाओं की शिकायत के लिए बने फोन नंबर 109 की दो लाइनों को बढ़ाकर दस की जाएंगी। इसके साथ 100 नंबर की मौजूदा 60 लाइनों को बढ़ाकर 100 लाइन करने का भी फैसला किया गया है।