{"_id":"e77fd985d71eeb856d72509d9f2a5023","slug":"home-ministry-probe-in-phone-tapping-case","type":"story","status":"publish","title_hn":"साहेब और जेटली फोन टैपिंग मामले की जांच करेगा गृह मंत्रालय","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
साहेब और जेटली फोन टैपिंग मामले की जांच करेगा गृह मंत्रालय
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 27 Dec 2013 08:52 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुजरात के युवती की जासूसी मामले की जांच के लिए गठित किया जाने वाला न्यायिक आयोग हिमाचल प्रदेश में प्रेम कुमार धुमल की सरकार के कार्यकाल के दौरान रिकार्ड किए गए फोन को नष्ट करने और दिल्ली में भाजपा नेता अरुण जेटली के गैरकानूनी कॉल डिटेल हासिल करने के मामले की भी जांच करेगा।
विज्ञापन
हालांकि जांच के नियम और शर्तें यानी टर्म ऑफ रिफरेंस तय नहीं हुए हैं। इसके लिए केंद्र सरकार कानून मंत्रालय से मदद ले रही है। कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार के इस फैसले को मोदी और भाजपा के खिलाफ चुनावी हथकंडे के तौर पर देखा जा रहा है।
विज्ञापन
इस फैसले पर भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया के मद्देनजर सरकार का कहना है कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की पहल पर यह कदम उठाया गया है।
इस फैसले के बाद गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सफाई में कहा कि इस फैसले के पीछे कोई राजनीतिक बदले की भावना या द्वेष नहीं है। शिंदे के मुताबिक राष्ट्रपति ने इस मामले में कार्रवाई की संभावना संबंधी निर्देश दिए थे।
विज्ञापन
गृह मंत्रालय के मुताबिक कई महिला संस्थाओं और नागरिकों ने राष्ट्रपति को महिला आर्किटेक्ट की गैरकानूनी जासूसी की जांच कराने संबंधी ज्ञापन दिया था। राष्ट्रपति ने उस ज्ञापन को आगे की कार्रवाई के लिए गृह मंत्रालय भेज दिया।
मंत्रालय के संयुक्त सचिव की अगुवाई वाली एक टीम ने आईबी की मदद से उस टेप के छानबीन की जो इस मामले में बड़ा सबूत माना जा रहा है। पिछले तीन हफ्ते की गहन छानबीन के बाद मंत्रालय ने फैसला लिया कि इस मामले की औपचारिक जांच आयोग से कराई जाए।
गृह मंत्रालय के मुताबिक यह आयोग कमीशन ऑफ इन्क्वायरी एक्ट 1952 की धारा 3 के तहत जांच करेगा। धारा के मुताबिक आम जनता से जुड़े हुए ऐसे मामलों की जांच का अधिकार केंद्र के पास है। भले वह मामला राज्यों से जुड़ा हो।
हिमाचल का मामला राज्य के कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरभद्र सिंह की गैरकानूनी फोन टैपिंग से जुड़ा है। आरोप है कि तत्कालीन धूमल सरकार ने फोन टैपिंग को नियम की अनदेखी कर गुप्त तरीके से नष्ट करवा दिया।
आईटी कानून के मुताबिक उस टेप को विभाग की स्क्रीनिंग कमेटी के सामने पेश करना चाहिए था। उधर दिल्ली में निजी शख्स द्वारा जेटली के कॉल डिटेल हासिल करने का मामले की जांच में फैसला हो जाने के बावजूद इसकी जांच आयोग के सुपुर्द की गई है।
माना जा रहा है कि धूमल और जेटली की जांच के आदेश गुजरात जासूसी की जांच पर पर्दा डालने के मकसद से किया गया है।