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मसर्रत की रिहाई पर मचा सियासी तूफान

Mon, 09 Mar 2015 10:59 AM IST
Updated Mon, 09 Mar 2015 10:59 AM IST
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home ministery sought report on mashrrat

कट्टर अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की रिहाई से उपजे सियासी तूफान के बीच केंद्र ने जम्मू-कश्मीर सरकार से इस मामले में रिपोर्ट मांगी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मुफ्ती मोहम्मद सईद की सरकार से पूछा है कि किन परिस्थितियों में मसर्रत को रिहा किया गया। मसर्रत की रिहाई के फैसले से गठबंधन की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं।

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इधर कुंआ उधर खाई वाली स्थिति में फंसी भाजपा ने रविवार को आपात बैठक कर पीडीपी पर न्यूनतम साझा कार्यक्रम की हद से बाहर जाकर फैसला लेने का आरोप लगाया। वहीं, पीडीपी ने कहा है कि मसर्रत की रिहाई न्यूनतम साझा कार्यक्रम का हिस्सा है।
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कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस ने भी मसर्रत की रिहाई को लेकर राज्य सरकार पर हमला बोला, वहीं पैंथर्स पार्टी ने रविवार और सोमवार को जम्मू बंद का आह्वान किया। रविवार को जम्मू में विहिप नेता प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि मसर्रत को फिर से गिरफ्तार किया जाए और इस फैसले के लिए मुख्यमंत्री मुफ्ती जनता से माफी मांगें।
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गृह मंत्रालय ने मांगी पूरे मामले में रिपोर्ट

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रविवार को अवकाश होने के बावजूद दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय में कश्मीर डिवीजन के अधिकारियों ने बैठकर इस मामले में राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगने की कार्रवाई पूरी की। सूत्रों के मुताबिक 2010 में घाटी में पथराव और हिंसा के मुख्य आरोपी मसर्रत के खिलाफ 15 मामले लंबित हैं।

उस पर देश के खिलाफ जंग छेड़ने और गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। सूत्रों ने यह भी बताया कि केंद्रीय गृह सचिव एलसी गोयल ने राज्य के पुलिस महानिदेशक के. राजेंद्र से बात कर मसर्रत की रिहाई के कारणों के बारे में पूछा है।

इस सबके बीच मसर्रत ने भी हुर्रियत की गतिविधियां तेज किए जाने का संकेत दिया है। उसने कहा कि सरकार ने उसे रिहा कर कोई अहसान नहीं किया है। उसकी रिहाई कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है। संबंधित अदालतों से भी उसे जमानत दे दी गई थी।

चेतावनी दी लेकिन सख्त फैसला लेने के मूड में नहीं भाजपा

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पहले पाकिस्तान का गुणगान, फिर अफजल और अब मसर्रत की रिहाई को लेकर विपक्ष के साथ-साथ अपनों के निशाने पर आई भाजपा ने पीडीपी को चेतावनी दी है कि अगर राज्य में साझा सरकार चलानी है तो उसे गठबंधन धर्म निभाना होगा।

उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह ने श्रीनगर में कहा कि इस मामले में पीडीपी से विरोध जताया जाएगा। हालांकि, गंठबंधन पर उनका कहना था कि इस संबंध में फैसला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लेना है। उधर, पीडीपी अपने रुख पर अड़ी है।

पार्टी के प्रवक्ता एवं शिक्षा मंत्री नईम अख्तर का कहना है कि मसर्रत को रिहा कर पीडीपी ने न्यूनतम साझा कार्यक्रम का उल्लंघन नहीं किया है।

उनका कहना है कि साझा कार्यक्रम में स्पष्ट किया गया है कि कश्मीर में हालात सामान्य बनाने के लिए हुर्रियत और अलगाववादी नेताओं से वार्ता की जाएगी। नईम अख्तर का कहना था कि किसी को जेल में बंद रखकर उसे वार्ता में शामिल नहीं किया जा सकता।

किसी के रहमो-करम पर नहीं छूटा : मसर्रत आलम

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जेल से बाहर आए अलगाववादी मसर्रत ने कहा है कि उसकी रिहाई किसी के रहमो करम पर नहीं हुई है। यह एक सामान्य कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं। उसने कहा कि पिछले 20 सालों से वह जेल के अंदर-बाहर होता रहा है। यह कोई नई बात नहीं है।

आतंकवादी है मसर्रत : सोफी यूसुफ

कश्मीर संभाग से भाजपा के इकलौते विधान परिषद सदस्य सोफी यूसुफ का कहना है कि मसर्रत आलम राजनीतिक कैदी नहीं, बल्कि आतंकवादी है। उसे रिहा नहीं किया जाना चाहिए था। इससे हालात बिगड़ेंगे। मसर्रत आलम 2010 में कश्मीर घाटी में दंगों के लिए जिम्मेदार है, जिसमें 120 लोग मारे गए थे।

अपनों के निशाने पर भाजपा

कट्टर अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की रिहाई के  बाद भाजपा के लिए जवाब देना भारी पड़ रहा है। विपक्ष के निशाने पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं तो दूसरी ओर पीडीपी के साथ गठबंधन को लेकर भाजपा आलाकमान पर अपनों की ओर से भी सवाल उठाए गए हैं।

संघ और शिवसेना ने भाजपा को हिदायत दी है। शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि यदि भाजपा के विरोध के बाद भी जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी जेल से छूटते हैं, तो वहां भाजपा की नहीं पाकिस्तान की सरकार चल रही है।
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