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धधकती चिताओं के बीच चिता की राख से खेली होली

Tue, 03 Mar 2015 08:49 AM IST
Updated Tue, 03 Mar 2015 08:49 AM IST
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Holly played from the ashes of a flaming pyre

काशी में मणिकर्णिका महाश्मशान पर सोमवार की दोपहर होली का अद्भुत नजारा लोगों के लिए यादगार बन गया। एक तरफ चिताएं धधकती रहीं तो दूसरी ओर बुझी चिताओं की भस्म से जमकर साधु-संत और भक्त होली खेलने में रमे रहे।

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खेलें मसाने में होरी दिगंबर... के बोल पर होरी गूंजी तो लोग थिरकने से खुद को नहीं रोक सके। दुनिया के कई देशों के पर्यटक भी चिता की भस्म से होली खेलने के उन क्षणों के साक्षी बने।
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गौरा का गौना कराने के दूसरे दिन सोमवार को मणिकर्णिका श्मशान पर होली देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। दिन के 12:30 बजे मशानेश्वर महादेव की भोग आरती हुई। इसके बाद सैकड़ों भक्त डमरू, त्रिशूल के साथ चिताओं की भस्म उड़ाकर होली खेलने लगे।
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फागुन के गीतों की गूंज पर थिरके साधु-संत और भक्त

Holly played from the ashes of a flaming pyre

कुछ ही देर में चिता की भस्म पोते जाने से लोगों को पहचानना मुश्किल हो गया। एक तरफ जलती चिताओं के आसपास गमगीन लोग थे और दूसरी ओर होली खेलने की रस्म पूरी करने वालों के ढोल-ताशे गूंजते रहे। तेज पुरवाई ने तो इस होली के नायाब रंगों को चिताओं तक भी पहुंचाया।

ठुमरी गायक पं. छन्नूलाल मिश्र की प्रसिद्ध होरी- खेलें मसाने में होरी दिगंबर... का ऑडियो बजने लगा। फिर क्या था, भस्म से होली खेलने वाले बाबा के भक्त थिरकने लगे। उस दृश्य को कैमरे में कैद करने की होड़ मच गई। चिता की भस्म से होली खेलने वालों में साधु-संत और अघोरी भी शामिल थे।

इस अनूठी होली में बाबा महाश्मशान मंदिर के व्यवस्थापक गुलशन कपूर, अध्यक्ष चैनू प्रसाद गुप्ता, पार्षद शिव सेठ, विजय शंकर पांडेय, बिहारी लाल गुप्ता, मनोज शर्मा, दीपक तिवारी, सूरज शास्त्री समेत तमाम लोग शामिल हुए।

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