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सवालों के घेरे में लियाकत की गिरफ्तारी
गुंजन कुमार/नई दिल्ली
Updated Sat, 23 Mar 2013 11:51 PM IST
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हिजबुल आतंकी सैयद लियाकत शाह की दिल्ली में गिरफ्तारी सवालों के घेरे में आ गई है। लियाकत परिवार के साथ आत्मसमर्पण करने जा रहा था।
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ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि आखिर वह एके 57 और ग्रेनेड हासिल करने के चक्कर में क्यों फंसेगा। जहां तक लियाकत की बात है तो यह नाम जम्मू-कश्मीर पुलिस के लिए नया नहीं है।
कुपवाड़ा के लालपुरा थाने में मार्च 2011 में दर्ज एफआईआर नंबर 22 की 97 आतंकियों की सूची में लियाकत का नाम 84वें नंबर पर है।
एफआईआर में लिखा है कि लियाकत आरोपी नंबर 28 और 32 के साथ दोबारा पाक गया था। 40 की उम्र पार कर चुके इन आतंकियों के आत्मसमर्पण के लिए राज्य सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विशेष अभियान चला रखा है।
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लियाकत इसी अभियान के तहत आत्मसमर्पण के लिए जम्मू-कश्मीर जा रहा था। मामले की जांच में लगी खुफिया एजेंसी ने सवाल खड़ा किया है कि अपने परिवार के साथ काफी मशक्कत के बाद आत्मसमर्पण के लिए नेपाल के रास्ते जम्मू-कश्मीर जाने वाला लियाकत एके-57 और हैंड ग्रेनेड हासिल करने के चक्कर में कैसे आ सकता है।
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एजेंसी ने दिल्ली पुलिस को आत्मसमर्पण को चलाए जा रहे अभियान की जानकारी नहीं होने पर भी हैरानी जताई जा रही है। गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर और दिल्ली पुलिस से इस बाबत पूरी रिपोर्ट मंगवाई है। दिल्ली पुलिस का दावा है कि उसे लियाकत के आत्मसमर्पण के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
उसका यह भी दावा है कि श्रीनगर के सीआरपीएफ कैंप में हुए हमले के बाद एक इंटरसेप्शन के जरिए लियाकत की दिल्ली में हमले की योजना के बारे में पता चला। उसके बाद से ही वह लियाकत के पीछे लगी थी। उसे मौका मिलते ही गिरफ्तार कर लिया गया।
गृह मंत्रालय के उच्चपदस्थ सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि केंद्र और राज्य सरकार ने योजना बनाई थी कि परिवार के जरिए आतंकियों को नेपाल के रास्ते जम्मू-कश्मीर लाकर उनके आत्मसमर्पण के लिए अभियान चलाया है।
माना जा रहा था कि इन आतंकियों का समर्पण घाटी के भटके नौजवानों के लिए उदाहरण बनेगा, लेकिन दिल्ली पुलिस के इस ऑपरेशन से इस योजना पर गहरा आघात लगा है।
उमर ने की एनआईए जांच की मांग
लियाकत की गिरफ्तारी से पैदा हुए हालात के बीच शनिवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे से फोन पर बातचीत की।
सीएम ने शिंदे से लियाकत की दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तारी की जांच एनआईए से कराने की मांग की है। उमर ने कहा है कि यह जांच तय समय सीमा में होनी चाहिए।
उमर गृह मंत्री से मिलने के लिए दिल्ली पहुंचे थे, लेकिन शिंदे के राष्ट्रपति के साथ महाराष्ट्र दौरे पर होने के कारण उन्हें फोन पर बात करनी पड़ी।