अनोखी मिसाल: इस गांव में हिंदू कराते हैं सामूहिक रोजा इफ्तार
गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक माने जाने वाले शादीपुर के ग्रामीण एक मिसाल हैं। गांव के मुस्लिम बस्ती के लोग हिंदुओं के घरों से आए पानी से रोजा इफ्तारी करते हैं। ये सिलसिला सालों से जारी है।
यही नहीं हिंदुओं द्वारा मुस्लिमों के लिए सामूहिक रोजा इफ्तार का भी आयोजन कराया जाता है। गांव में कादरी बिरादरी की बस्ती में रमजान में लगभग सभी मुस्लिम रोजा रखते हैं। रमजान के दौरान यह गांव देशवासियों के लिए एक मिसाल है।
गांव के मुस्लिम बच्चे हिंदुओं के घरों से पानी लाते हैं तो कुछ हिंदू परिवार खुद ही मुस्लिमों के घर पानी देकर आते हैं। मुस्लिमों द्वारा रोजा इफ्तार हिंदुओं के घर से आए इसी पानी की घूंट भरकर किया जाता है। यही नहीं, कई हिंदुओं द्वारा सामूहिक रोजा इफ्तार भी कराया जाता है।
कई साल से गांव में चली आ रही परंपरा
गांव में सालों से यही सिलसिला चला आ रहा है। गांव के जाकिर, आशिक, यासीन, मो. नईम आदि का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि सबसे पहले गांव के किस मुस्लिम ने हिंदू के घर से पानी लाकर इफ्तार करना शुरू किया था, लेकिन अब ये गांव में एक परंपरा की तरह बन गया है।
सभी मुस्लिम परिवार हिंदुओं के घरों से आए पानी से इफ्तार करते हैं। वहीं राहुल पंवार, कपिल कुमार, रवि गुप्ता, अखिल कुमार आदि का कहना है कि गंगा-जमुनी तहजीब तो गांवों की खासियत है। सभी धर्म बराबर हैं और सभी धर्म के लोगों का सम्मान होना चाहिए।
उनके मुताबिक उनके परिवारों से मुस्लिमों की रोजा इफ्तारी के लिए सालों से पानी जा रहा है और जाता रहेगा। उनके मुताबिक इसी भाईचारे के कारण गांव में दोनों समुदाय के ग्रामीण मिलकर रहते हैं और कभी कोई विवाद नहीं होता।