फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Hindu group to stop Muslim writer

राम पर कॉलम लिखने से मुसलमान लेखक को रोका

Fri, 04 Sep 2015 05:39 PM IST
Updated Fri, 04 Sep 2015 05:39 PM IST
विज्ञापन
Hindu group to stop Muslim writer

हिंदू चरमपंथी संगठनों के बढ़ते दबाव के कारण मलयालम लेखक को रामायण पर कॉलम बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा। लेखक को कथित हिंदू चरमपंथी संगठनों से धमकी मिल रही थी।

विज्ञापन

केरल के मलयालम लेखक और समालोचक एमएम बशीर को बीते दिनों रामायण को लेकर अपना स्तंभ बंद करना पड़ा। इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक लेखक एमएम बशीर ने बीते अगस्त में दैनिक मातृभूमि के लिए मलयालम में रामायण को लेकर लगातार अपने स्तंभ लिख रहे थे।

विज्ञापन

दैनिक मातृभूमि के संपादक से उन्होंने छह स्तंभ लिखने का वादा किया था। लेकिन कथित हिंदू चरमपंथी संगठन से मिल रही धमकियों के कारण उन्हें अपना लेखन मजबूरन बंद करना पड़ा, और वे पांच ही स्तंभ लिख पाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

फोन पर मिली धमकियां

Hindu group to stop Muslim writer

रामायण पर स्तंभ लिखने के कारण लेखक एमएम बशीर को कुछ अनजान लोगों की ओर से लगातार फोन पर धमकियां मिल रही थीं और उन्हें अपना लेखन बंद करने के लिए कहा गया।


लेखन बंद करने का दबाव बनाने वाले लोंगों को इस बात से ऐतराज था कि बशीर मुसलमान होने के बावजूद राम पर क्यों लिख रहे हैं। वहीं जब रामायण की इस श्रंखला में जब बशीर का पहला स्तंभ प्रकाशित हुआ तो पहले ही दिन संपादक को लोगों के विरोध को सामना करना पड़ा।


मालूम हो कि बीते तीन अगस्त को बशीर का पहला स्तंभ ‘श्रीराम का रोष’ प्रकाशित हुआ तो कुछ लोगों ने इस बात का कड़ा विरोध किया। विरोध और लगातार फोन पर मिल रही धमकियों के बाद पांचवां स्तंभ छपने के बाद बशीर ने कॉलम न लिखने का फैसला किया कि वे अब आगे नहीं लिखेंगे।


केरल के कोझिकोड में रह रहे एमएम बशीर ने बताया कि रामायण पर स्तंभ लिखने के कारण हर दिन मुझे गालियां दी जातीं। 75 साल की उम्र में मैं सिर्फ मुसलमान होकर रह गया।


बाद में मुझसे यह सब सहा नहीं गया और मैंने लिखना बंद करने का फैसला किया। केरल के कालीकट विश्वविद्यालय में मलयालम के पूर्व प्रोफेसर बशीर ने कहा कि फोन करने वाले उनसे पूछते हैं कि तुम्हें भगवान राम पर लिखने का क्या अधिकार है।

वाल्मीकि द्वारा भगवान राम की आलोचना पर बवाल

Hindu group to stop Muslim writer

बशीर ने बताया कि मेरे स्‍ंतभों की सीरीज वाल्मीकि की रामायण पर आधारित थी। वाल्मीकि ने राम का चित्रण मानवीय गुणों के आधार पर किया है और उनके कामों की आलोचना से उन्होंने परहेज नहीं किया। बशीर ने बताया कि फोन करने वालों ने वाल्मीकि द्वारा राम की आलोचना को विवाद के तौर पर लिया।


बताया कि ''कई लोगों ने मेरे पक्ष को जानने और समझने की कोशिश तक नहीं कि और मुझे गालियां देते रहे। ‘जिन लोगों ने उनकी बात को सुना उन्हें मैंने बताया कि पिछले साल अध्यात्म रामायण पर मैंने मलयालम में लिखा था। और उसमें मैंने भगवान राम पर अपनी बात रखी थी।


कुछ लोग तो इन दोंनो पाठों का अंतर जानते थे, लेकिन उन्हें धमकी देने वालों का कहना था कि वे एक मुसलमान है और भगवान राम को मानवीय गुणों वाला दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।''

परंपराविरोधी समालोचक लेखक हैं बशीर

Hindu group to stop Muslim writer

मलयालम कवि कुमारन असन की पांडुलिपियों पर डॉक्टरेट करने वाले बशीर को परंपराविरोधी समालोचक लेखक के तौर पर देखा जाता है। हालांकि वे एक धर्मनिष्ठ मुसलमान हैं, लेकिन कभी किसी धार्मिक मंच से नहीं जुड़े हैं।


एक अध्यापक और मलयालम साहित्य में आधुनिकतावादी लेखक के तौर पर उनकी खासी पहचान है। दैनिक मातृभूमि में रामायण पर उन्होंने जो पांच स्तंभ लिखे वह सीता की अग्निपरीक्षा पर वाल्मीकि द्वारा राम की कथित आलोचना पर थी।


उधर दैनिक मातृभूमि से जुड़े सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की पिछले दिनों दफ्तर में संपादकीय डेस्क पर कई बार ऐसे फोन आए, जिनमें लेखक बशीर और अखबार की आलोचना की गई। लोगों का कहना था कि एक मुसलमान को रामायण पर लिखने को क्यों कहा गया।

दफ्तर में फोन करने वालों ने अपने नाम नहीं बताए और ना ही किसी संगठन का नाम लिया। लेकिन एक राजनैतिक दल के सहयोगी संगठन ने कोझिकोड में अखबार के दफ्तर के पास पोस्टर लगाकर विरोध किया।

यहां यह पहली बार नहीं हुआ

Hindu group to stop Muslim writer

मुसलमान और मलयालम लेखक एमएम बशीर के साथ हुई यह घटना कोई पहली नहीं है पहले भी इस तरह की कई घटनाएं हुई हैं। कुछ माह पहले एक हिंदूवादी संगठन ने ‘किस आफ लव’ का विरोध करने वालों की गिरफ्तारी पर शहर में जमकर तोड़फोड़ की थी।


वैसे यह पहला मौका नहीं है जब धार्मिक पहचान के आधार पर, रामायण पर लिखने पर किसी मलयालम लेखक के खिलाफ इस तरह का कोई अभियान चलाया गया।


पहले भी कुछ ईसाई और इस्लामी कट्टरपंथियों ने लेखकों और रंगकर्मियों को अपना निशाना बनाया और विरोध कर उनके काम पर रोक लगाने की मांग की।


इस पूरी घटना पर मातृभूमि के संपादक केशव मेनन का कहना है कि इस तरह की घटनांए केरल में बढ़ते सांप्रदायिक विभाजन की ओर इशारा कर रही हैं। जिसकी वजह से समाचार और विचार के प्रति असहिष्णुता बढ़ रही है।


उनका कहना है कि जो धार्मिक आस्थाओं के नाम पर गड़बड़ी फैलाते हैं, वे समुदाय के कुछ ही लोग हैं। लेकिन विभिन्न समुदायों के मुख्यधारा के संगठन उनकी आलोचना करने से बचते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed