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बचाव कार्यों में बाधा बनी अफसरों की लापरवाही

Sun, 23 Jun 2013 12:40 AM IST
नई दिल्ली/धीरज कनोजिया
नई दिल्ली/धीरज कनोजिया Updated Sun, 23 Jun 2013 12:40 AM IST
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Hindrance to rescue the negligence of officials

उत्तराखंड में त्रासदी से पहले ही नहीं बल्कि बाद में भी मंत्रियों और अफसरों की लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही है। इस लापरवाही का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

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शनिवार को राज्य सरकार की ओर से देश के ज्यादातर अखबारों में मुख्यमंत्री के फोटो के साथ छपे विज्ञापन में पीड़ितों के परिजनों के लिए छपे हेल्पलाइन नंबर ही मुश्किल का सबब बन गए हैं।
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दरअसल, कई नंबर गलत छपे हैं। ऐसे में इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि अपने खोए परिजनों के बारे में जानकारी हासिल करने वाले लोग इस एक चूक से कितना परेशान हुए होंगे।
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लापरवाही का सिलसिला यहीं खत्म नहीं होता। देशभर से लोग उत्तराखंड में राहत सामग्री भेजने के लिए तैयार बैठे हैं। मगर प्रदेश में अभी राहत सामग्री इकट्ठा करने के लिए रिलीफ मैटेरियल डेस्क ही तैयार नहीं है।

देहरादून में सामग्री किसके हवाले किया जाए। कैसे इसे रखा जाएगा। इसे लेकर अभी कोई योजना बनी नहीं है।

लिहाजा, देहरादून की ओर से रवाना हो गई राहत सामग्री के वहां खुले में पड़े रहने के आसार बन गए हैं और जबकि वहां एक दो दिन में बारिश होने की संभावना है।

वहां राहत सामग्री भेजने वाले लोगों को इस अव्यवस्था से परेशानी हो रही है।

आपदा राहत अभियान से छपे विज्ञापन में राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, देहरादून के नंबर छपे हुए हैं। विज्ञापन में दूरभाष: 0135-2178400, 0135-2710334, 2710335, 2178401-04 छपा है। इनमें 2178401-04 नंबर गलत है।

जबकि 0135-2710334, 2710335 नंबर सही है। इसी तरह फैक्स नंबर 2178400 भी गलत है।

इस बारे में आपदा राहत मंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष यशपाल आर्य से अमर उजाला ने पूछा तो उनका कहना था कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है। वह इसके बारे में पता लगाकर इसे सही करवाएंगे।


यही नहीं, कैबिनेट सचिव अजीत सेठ की समीक्षा बैठकों में लगातार सेना और राज्य सरकार के बचाव कार्य में तालमेल नहीं होने की बात सामने आ रही है।

प्रभावित जिलों के अधिकारियों ने शिकायत की है कि सेना के बड़े अफसर उनकी बात नहीं सुन रहे हैं। वे अपनी सूचना के आधार पर काम कर रहे हैं। जबकि उनकी ओर से दी गई सूचना को तवज्जो नहीं दे रहे हैं।

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