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क्या आप भी इंटरनेट पर हिंदी नहीं लिख पा रहे...

Sat, 01 Jun 2013 09:13 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Sat, 01 Jun 2013 09:13 PM IST
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hindi writing is not easy at internet

क्या आप भी इंटरनेट पर हिंदी में कुछ लिखने में परेशानी महसूस करते हैं। क्योंकि यह आपके अकेले की समस्या नहीं है। काफी लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं और सरकार बेफिक्र है।

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इंटरनेट पर हिंदी लिखना आसान नहीं है। गूगल पर हिंदी में सर्च करते वक्त लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

साथ ही फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर हिंदी में लिखने में लोगों को परेशानी आती हैं। बाजार में उपलब्ध हर पर्सनल कंप्यूटर या लैपटॉप में हिंदी लिखने की सुविधा है। मगर फिर भी हिंदी इंटरनेट यूजर्स को जूझना पड़ता है। इसके लिए सरकार की बेरुखी जिम्मेदार है।
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सरकार ने हिंदी को इंटरनेट पर आसान बनाने के लिए कोई खास कदम ही नहीं उठाए। साथ ही हिंदी को इंटरनेट पर आसानी से टाइप करने को लेकर भी कोई जागरूकता अभियान नहीं चलाया गया है। जिसके चलते इंटरनेट में काम करने वाला हिंदी में काम करने की हिम्मत ही नहीं जुटा पता। उसे मजबूरी में अंग्रेजी में ही निर्भर करना पड़ता है।
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कंप्यूटर पर हिंदी लिखने में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि ये अंग्रेजी की तरह हर कंप्यूटर पर पहले से एक्टिव यानी सक्रिय नहीं होती। हिंदी लिखने वाले को इसे पहले सक्रिय करना पड़ता है। ऐसा शायद भारत में ही होता है। बल्कि दूसरे देशों में कंप्यूटरों में पहले से ही वहां की बोले जाने वाली भाषा को एक्टिव किया जाना अनिवार्य है।

वहीं अंग्रेजी सभी कंप्यूटरों में एक्टिव होती है। जिस तरह कंप्यूटर में हिंदी एक्टिव नहीं की गई है। वैसे ही यहां की-बोर्ड पर भी हिंदी के अक्षर लिखे नहीं जाते है। दूसरे देशों में वहां की भाषा के अक्षर की-बोर्ड पर लिखे जाने की अनिवार्यता है।

जिन लोगों को हिंदी में टाइप करना आता भी है, वह भी सोशल नेटवर्किंग साइटों में एकदम हिंदी नहीं लिख सकते। उसके लिए भी उनको तमाम कसरत करनी पड़ती है।

आईटी और दूरसंचार मामलों के जानकार सुधीर उपाध्याय कहते है कि हिंदी को अभी काफी रास्ता लंबा तय करना है। इसके लिए जागरूकता होना बहुत जरूरी है। सूचना और तकनीक मंत्रालय की संस्था सी डैक ने अच्छा काम किया है। इसे लोगों को बताने की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि हिंदी का उपयोग करने वालों के लिए कंप्यूटर और तकनीक के प्रति जागरूकता की कमी भी देखने को मिल रही है। हालांकि यूनीकोड एनकोडिंग में हिंदी को शामिल करने से कुछ समस्याएं हल हुई हैं। कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम में हिंदी यूनीकोड का समर्थन सबसे जरूरी है, क्योंकि इसके बिना कोई भी यूनीकोड आधारित सॉफ्टवेयर काम नहीं कर सकता।


सुधीर के मुताबिक हिंदी की इस यूनीकोर्ड व्यवस्था का हर कोई जानकार नहीं है। उपाध्याय कहते है कि हिंदी समेत अन्य क्षेत्रीय भाषाएं इंटरनेट के सागर में अपनी पहचान कब और कैसे बनाएंगी। इस पर काम जारी है मगर मंजिल अभी दूर है।

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