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श्रीलंका के इन स्कूलों में अनिवार्य है हिंदी

Thu, 11 Sep 2014 11:53 AM IST
अमित कुलश्रेष्ठ/अमर उजाला, आगरा
अमित कुलश्रेष्ठ/अमर उजाला, आगरा Updated Thu, 11 Sep 2014 11:53 AM IST
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hindi craze in srilanka

समंदर में एक-एक पत्थर डालकर सोने की लंका तक पहुंचने के लिए त्रेता युग में जिस तरह राम-सेतु बनाया गया, हजारों साल बाद अब हिंदी भाषा के अक्षर उसी श्रीलंका के साथ सनातन रिश्ते के बीच पुल बनकर मजबूती दे रहे हैं। बचपन से रामायण और रामचरित मानस के जरिए रामकथा से रूबरू हिंदुस्तान की भाषा हिंदी का डंका उस ‘सोने की लंका’ यानी श्रीलंका में इस तरह बज रहा है कि पांच स्कूलों में हिंदी अनिवार्य है और हर साल 600 छात्र हिंदी में डिप्लोमा हासिल कर रहे हैं।

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आगरा के केंद्रीय हिंदी संस्थान में श्रीलंकाई छात्रों की तादात में साल दर साल बढ़ोतरी हो रही है, वहीं श्रीलंका के विश्वविद्यालयों में हिंदी में डिप्लोमा हासिल करने वालों का आंकड़ा बढ़ रहा है।
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श्रीलंका में हिंदी के कोर्स से लेकर सिलेबस और परीक्षा कराने की जिम्मेदारी संभाल रहे केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा हर साल 600 छात्रों की परीक्षा कराई जा रही है। श्रीलंका सरकार ने अब 5 स्कूलों में हिंदी को अनिवार्य भी कर दिया है।
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दरअसल, इंडो-आर्यन परिवार की भाषा के तौर पर श्रीलंका के सिंहली हिंदी से खासे प्रभावित हैं। महात्मा बुद्ध की धरती पर बोली जाने वाली भाषा के प्रति श्रीलंका में लगाव है। भारतीय संस्कृति, गीत, संगीत के बाद अनिवार्य की गई हिंदी श्रीलंका में तेजी से जगह बना रही है।

इन देशों में हिंदी का क्रेज ज्यादा

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केंद्रीय हिंदी संस्थान में अंतर्राष्ट्रीय भाषा विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. मीरा सरीन का कहना है कि रामायण काल से श्रीलंका का जुड़ाव और महात्मा बुद्ध की धरती से श्रीलंकाई लोग प्रभावित हैं। हिंदी उनके लिए न केवल रोजगार का जरिया है, जबकि कारोबार को भी नई ऊंचाईयों पर ले जाने का साधन है। बेहद सम्मान की भावना के साथ श्रीलंकाई विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति ललक है।

विदेशियों के लिए सौभाग्य की हिंदी
अपने मुल्क में हिंदी बोलने में ‘एलीट क्लास’ बेशक हिचकता हो, लेकिन सात समंदर पार विदेशी सरजमीं पर हिंदी रोजगार पाने का सबसे बड़ा जरिया बन रही है। एशिया हो या यूरोप, अफ्रीका हो या अमेरिका महाद्वीप। यहां हिंदी का जलवा हर दिन बढ़ रहा है। चीन, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, टर्की, जापान से छात्र-छात्राओं की तादात बढ़ रही है। केंद्रीय हिंदी संस्थान में 20 देशों से 70 विदेशी छात्र-छात्राएं इस साल आ चुके हैं।

इन चार देशों में हिंदी का क्रेज ज्यादा
प्रमुख देश-विद्यार्थी
थाईलैंड---12
श्रीलंका---10
चीन---7
दक्षिण कोरिया--9

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