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हिमाचल चुनाव: आसान नहीं यहां वोट डलवाने
शिमला/रोहित नागपाल
Updated Wed, 31 Oct 2012 08:08 AM IST
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हिमाचल में मतदान प्रत्याशियों के लिए नहीं, बल्कि मतदान पार्टियों के भी बड़ी चुनौती होगा। प्रदेश में 40 से ज्यादा बूथ 11 हजार फीट से ज्यादा ऊंचाई पर हैं।
यहां चुनाव सामग्री पहुंचाना और टीमों को भेजकर मतदान करवाना सीमा पर किसी युद्ध लड़ने से कम नहीं होता है। लाहौल के हिक्कम, किब्बर और किलाड़ तीन बूथ सबसे ज्यादा ऊंचाई पर हैं। इन बूथों में बीस फीसदी मतदान केंद्र ऐसे हैं, जहां चुनावी टीमों को पहुंचने के लिए कई घंटों तक पैदल ही सफर करना होगा।
मतदान के लगी टीमों को 11 से 24 किलोमीटर तक का सफर पैदल तय करना होगा। पार्टियों को पैदल पगडंडियों से होते हुए इन बूथों तक पहुंचना होगा। इसमें सड़क से सबसे दूर रामपुर निर्वाचन क्षेत्र में काशा बूथ और बंजार निर्वाचन क्षेत्र का शक्ति बूथ है। इतनी ज्यादा ऊंचाई वाले पोलिंग बूथों पर आक्सीजन की कमी से लेकर अन्य मुश्किलों का सामना करना पड़ता रहा है।
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मौसम खराब होने की स्थिति में हर तरह का संचार नेटवर्क साथ छोड़ देता है। इसलिए ऐसे बूथों पर आयोग की ओर से सेटेलाइट फोन दिए जा रहे हैं। हालांकि, संभावना है कि कुछ बूथों पर यह भी बेहतर सेवाएं न दे सके तो पुलिस की वायरलेस की सुविधा लेने के निर्देश दिए हैं। लाहौल-स्पीति, किन्नौर, पांगी, डोडराक्वार से लेकर बड़ा भंगाल ऐसे क्षेत्र हैं, जहां अधिकतर बूथों पर पोलिंग करवाना चुनौती है। यहां पहुंचने से लेकर पोलिंग टीमों के साथ सामान को पहुंचाना टेढ़ीखीर है।
मुश्किलों के बावजूद, तैयारी पूरी: आयोग
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र चौहान ने कहा कि बड़ा भंगाल में हेलीकॉप्टर से चुनाव सामग्री और टीमें भेजी जाती हैं। दूरदराज के क्षेत्रों में 40 से ज्यादा बूथ 11 हजार फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर बने हैं। आयोग ने टीमें तैयार कर ली हैं। इन्हें शीघ्र ही रवाना कर दिया जाएगा। इनका पूरा कार्यक्रम तैयार किया है। इसमें कहीं यदि मौसम या अन्य बाधा आती है तो इसके लिए दूसरी व्यवस्था हेलीकॉप्टर की कर रखी है।
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यहां चुनाव सामग्री पहुंचाना और टीमों को भेजकर मतदान करवाना सीमा पर किसी युद्ध लड़ने से कम नहीं होता है। लाहौल के हिक्कम, किब्बर और किलाड़ तीन बूथ सबसे ज्यादा ऊंचाई पर हैं। इन बूथों में बीस फीसदी मतदान केंद्र ऐसे हैं, जहां चुनावी टीमों को पहुंचने के लिए कई घंटों तक पैदल ही सफर करना होगा।
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मतदान के लगी टीमों को 11 से 24 किलोमीटर तक का सफर पैदल तय करना होगा। पार्टियों को पैदल पगडंडियों से होते हुए इन बूथों तक पहुंचना होगा। इसमें सड़क से सबसे दूर रामपुर निर्वाचन क्षेत्र में काशा बूथ और बंजार निर्वाचन क्षेत्र का शक्ति बूथ है। इतनी ज्यादा ऊंचाई वाले पोलिंग बूथों पर आक्सीजन की कमी से लेकर अन्य मुश्किलों का सामना करना पड़ता रहा है।
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मौसम खराब होने की स्थिति में हर तरह का संचार नेटवर्क साथ छोड़ देता है। इसलिए ऐसे बूथों पर आयोग की ओर से सेटेलाइट फोन दिए जा रहे हैं। हालांकि, संभावना है कि कुछ बूथों पर यह भी बेहतर सेवाएं न दे सके तो पुलिस की वायरलेस की सुविधा लेने के निर्देश दिए हैं। लाहौल-स्पीति, किन्नौर, पांगी, डोडराक्वार से लेकर बड़ा भंगाल ऐसे क्षेत्र हैं, जहां अधिकतर बूथों पर पोलिंग करवाना चुनौती है। यहां पहुंचने से लेकर पोलिंग टीमों के साथ सामान को पहुंचाना टेढ़ीखीर है।
मुश्किलों के बावजूद, तैयारी पूरी: आयोग
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र चौहान ने कहा कि बड़ा भंगाल में हेलीकॉप्टर से चुनाव सामग्री और टीमें भेजी जाती हैं। दूरदराज के क्षेत्रों में 40 से ज्यादा बूथ 11 हजार फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर बने हैं। आयोग ने टीमें तैयार कर ली हैं। इन्हें शीघ्र ही रवाना कर दिया जाएगा। इनका पूरा कार्यक्रम तैयार किया है। इसमें कहीं यदि मौसम या अन्य बाधा आती है तो इसके लिए दूसरी व्यवस्था हेलीकॉप्टर की कर रखी है।