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हिमाचल में सियासी जमीन की तलाश में छोटे दल

Thu, 01 Nov 2012 10:47 PM IST
शिमला/अमर उजाला ब्यूरो
शिमला/अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 01 Nov 2012 10:47 PM IST
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himachal election small parties want win more seats
हिमाचल प्रदेश में दो दशकों से भाजपा और कांग्रेस को छोड़कर अन्य दल सियासी जमीन तलाश रहे हैं। 1985 और इससे पहले के चुनावों में हिमाचल का चुनाव चार से छह दलों के बीच होता रहा है। इनमें कांग्रेस, भाजपा, जनता पार्टी, माकपा और भाकपा शामिल रहते थे। 1990 के चुनावों में हिमाचल में 11 राजनीतिक दल चुनावी समर में उतरे।
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इनमें बहुजन समाज पार्टी, दूरदर्शी पार्टी, अखिल भारतीय हिंदू महासभा और प्रूटिस्ट ब्लॉक इंडिया पार्टी ने भी अपने प्रत्याशी उतारे। इन चुनावों में भाकपा प्रत्याशी ने बिलासपुर जिले से जीत हासिल की। वर्ष 1993 में दस राजनीतिक दलों ने चुनाव लड़ा। इन चुनावों में माकपा ने शिमला में पहली बार खाता खोला।

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1998 के चुनावों में हिमाचल विकास कांग्रेस ने दस्तक दी। इन्हें मिलाकर 12 पार्टियों ने चुनावों में प्रत्याशी उतारे। हिविकां को इन चुनावों में पांच सीटें मिलीं। 2003 के चुनावों में 12 राजनीतिक दलों ने प्रत्याशी उतारे। इन चुनावों में नाहन से लोक जनशक्ति पार्टी और धर्मपुर से लोकतांत्रिक मोर्चा हिमाचल प्रदेश से एक-एक सीट जीती।
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2007 में बारह पार्टियों ने चुनाव लड़ा। बसपा ने बड़े स्तर पर चुनाव लड़ा और कांगड़ा में एक सीट भी जीती। इनके अलावा अन्य दलों को कोई सफलता हाथ नहीं लगी। अब 2012 के चुनावों में फिर से 14 दल चुनावी दंगल में उतरे हैं।


इनमें भाजपा, कांग्रेस को छोड़कर हिलोपा, माकपा और भाकपा, बसपा, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, एनसीपी, लोक जनशक्ति पार्टी, हिमाचल स्वाभिमान पार्टी, शिवसेना, भारतीय बहुजन पार्टी, इंडियन जस्टिस पार्टी, हिंदुस्तान निर्माण दल के प्रत्याशी चुनावी रण में उतरे हैं।

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