रूसी कंपनी ने बिल क्लिंटन को दिया पैसा, मुश्किल में हिलेरी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन राष्ट्रपति पद की दौड़ में एक बार फिर शामिल हुई हैं, लेकिन उन पर विवादों का साया उनकी राह मुश्किल कर रहा है। हाल ही में सरकारी कामों में निजी ईमेल के इस्तेमाल का मुद्दा अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अब हिलेरी एक और मामले में फंसती नजर आ रही हैं।
नये विवाद में हिलेरी के पति बिल क्लिंटन की संस्था ‘क्लिंटन फाउंडेशन’ को रूसी यूरेनियम कंपनी से पैसे मिलने के आरोप लगाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि रूस के साथ हुए यूरेनियम सौदे की एवज में उनके फाउंडेशन को ये पैसे मिले। हालांकि हिलेरी की चुनाव टीम के मुताबिक यह आरोप बेबुनियाद हैं। उनके मुताबिक इस संबंध में कोई सबूत नहीं हैं।
उल्लेखनीय है कि रूस की परमाणु ऊर्जा एजेंसी रोसेटॉम ने कनाडाई कंपनी का अधिग्रहण कर लिया था। जब इस सौदे को मंजूरी दी गई थी, तब हिलेरी क्लिंटन विदेश मंत्री थीं। कहा जाता है कि कनाडाई खनन उद्योग के नेता अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और उनके परिवार की संस्था को दान देते रहे हैं।
इन लोगों ने रूस को यूरेनियम वन नाम की कंपनी बेची। इस कंपनी के बिकने का अंजाम यह हुआ कि अमेरिका की कुल यूरेनियम उत्पादन क्षमता का पांचवां हिस्सा रूस के नियंत्रण में चला गया। ऐसे में इस सौदे को लेकर सवाल उठने लगे। इसी बीच क्लिंटन फाउंडेशन को मिले दान की वजह से हिलेरी पर उंगली उठने लगी। यह विवाद अब तक उनका पीछा कर रहा है।
दान पहले भी बन चुका है मुसीबत
क्लिंटन फाउंडेशन को मिला दान हिलेरी के लिए पहले भी मुसीबत खड़ी कर चुका है। साल 2008 के राष्ट्रपति चुनावों में भी हिलेरी को हार का सामना करना पड़ा था।
रूस के साथ हुए यूरेनियम सौदे में बड़ी भागीदारी रखने वाले गिउस्त्रा को कजाकिस्तान में एक खनन सौदे को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद गिउस्त्रा ने क्लिंटन फाउंडेशन को लाखों रुपये का दान किया था। माना गया कि इस बारे में अखबारों में खबरें आने का असर हिलेरी के चुनावी अभियान पर पड़ा और उनको हार का सामना करना पड़ा।
इस विवाद से दूर हिलेरी क्लिंटन ने देश में लिंग भेद को दूर कर समान वेतन लागू करने पर जोर दिया है। उन्होंने भारतीय महिला उद्यमियों का उदाहरण देते हुए महिलाओं को भी समान मौके देने की पैरवी की। उन्होंने यह बात ‘विश्व में महिलाएं’ कार्यक्रम में कही।