सर्वोच्च अदालत से इंसाफ पाना हुआ महंगा
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सर्वोच्च अदालत में अब रिट याचिकाएं और जनहित याचिकाएं (पीआईएल) दायर करना महंगा हो गया। सर्वोच्च अदालत ने 1966 के नियमों में संशोधन करते हुए अधिकतर याचिकाओं के दाखिल किए जाने की प्रक्रिया में कोर्ट फीस को दस गुना बढ़ा दिया है। जनहित याचिका पर लगने वाला शुल्क 50 से बढ़कर 500 हो गया है।
शीर्षस्थ अदालत की ओर से नए नियमों में बढ़ाई गई कोर्ट फीस के अलावा आवेदनों के दाखिल किए जाने वाले शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है। यदि किसी पक्षकार की ओर से लिखित बयान दाखिल किया जाएगा तो उसे 50 की बजाय बढ़े हुए शुल्क 500 का भुगतान करना होगा।
जबकि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत दाखिल होने वाली अपीलों पर भी शुल्क अब 250 की बजाय पांच हजार रुपये देना होगा। यह शुल्क बीस गुना बढ़ाया गया है।
वकीलों की फीस को बढ़ाया गया दस गुना
उसी तर्ज पर इलेक्शन पिटीशन दाखिल करने वाले को सुरक्षा के तौर पर अब पचास हजार रुपये जमा करने के साथ ही बीस हजार रुपये शुल्क का भुगतान करना होगा। जबकि यह फीस पहले 250 रुपये थी और सुरक्षा के तौर पर बीस हजार रुपये जमा किए जाने का प्रावधान था।
उसी तरह विशेष अनुमति याचिकाओं और वकीलों की फीस को भी दस गुना बढ़ा दिया गया है। जो पहले 250 थी और अब 2500 रुपये होगी। बढ़ी हुई फीस 14 अगस्त से लागू होगी।
जबकि मौत की सजा के मामलों पर अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ही सुनवाई करेगी, यह प्रावधान भी नए नियमों में किया गया है।