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UPTET: उम्र में छूट पर हाइकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

Sat, 21 Sep 2013 04:01 PM IST
अमर उजाला, इलाहाबाद
अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Sat, 21 Sep 2013 04:01 PM IST
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highcourt verdict on age limit in teacher recruitment

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापकों की भर्ती में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को आयुसीमा में छूट देने के मामले में प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है।

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अभ्यर्थियों का आरोप है कि टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को आयुसीमा में छूट दी जानी चाहिए थी। मगर बेसिक शिक्षा परिषद् द्वारा जारी विज्ञापन में आयुसीमा में छूट नहीं दी गई है।
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ऐसा नहीं करने से हजारों योग्य अभ्यर्थी आवेदन करने से वंचित रह गए। शालिनी गंगवार और अन्य ने इस मामले में याचिका दाखिल की है।

याची के अधिवक्ता वेदमणि तिवारी ने बताया कि बेसिक शिक्षा परिषद् नियमावली 1981 के पैरा छह के अनुसार आयुसीमा में छूट दी जानी चाहिए थी।

आठ अक्टूबर 2012 को जारी शासनादेश के अनुसार जो आवेदक पद रिक्त न होने के कारण आवेदन नहीं कर सके थे, उनकी आयु नियुक्ति की तिथि को पचास साल से अधिक नहीं होनी चाहिए।
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प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्ति के समय इस आदेश का पालन किया गया। जूनियर हाईस्कूल में नियुक्ति हेतु जारी विज्ञापन में आयु सीमा में छूट न देने से हजारों अभ्यर्थी आवेदन करने से वंचित हो गए हैं।

जूनियर अध्यापकों की भर्ती में फंसा पेंच
जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापकों की भर्ती के मामले में क्वालिटी प्वाइंट अंक का पेच फंस गया है। अभ्यर्थियों ने भर्ती के लिए अपनाई गई प्रक्रिया को चुनौती दी है। इसे विभेदकारी बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है।

हाईकोर्ट ने याचिका पर राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। आलोक कुमार यादव द्वारा दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति वीके शुक्ला सुनवाई कर रहे हैं।

प्रदेश के जूनियर हाईस्कूलों में 29,328 सहायक अध्यापकों की भर्ती होनी है। भर्ती नियमावली के अनुसार बीएड में प्रथम श्रेणी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को 12 अंक, द्वितीय श्रेणी को 06 और तृतीय श्रेणी वालों को 03 अंक दिए जाएंगे।

याचियों को इस व्यवस्था से ऐतराज है। उनके मुताबिक व्यवस्था दोषपूर्ण है। उनका तर्क है कि अलग-अलग विश्वविद्यालयों में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने के लिए अंकों की अर्हता अलग है।


उदाहरण के लिए पूर्वांचल विश्वविद्यालय में प्रथम श्रेणी के लिए 75 प्रतिशत अंक अनिवार्य है, वहीं आगरा विश्वविद्यालय में 60 प्रतिशत अंक। श्रेणी देने में अंकों का अंतर होने के कारण मेरिट प्रभावित होगी।

ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगा। याची का कहना है कि क्वालिटी अंक के बजाए प्राप्तांक प्रतिशत को चयन का आधार बनाया जाए।

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