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पहली पत्नी को देना ही होगा भत्ता: हाईकोर्ट

Thu, 27 Sep 2012 09:11 PM IST
मुंबई/एजेंसी
मुंबई/एजेंसी Updated Thu, 27 Sep 2012 09:11 PM IST
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high court said that allowance will have to pay first wife
बांबे हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि कोई मुसलिम व्यक्ति दूसरी शादी करने के बाद अपनी पहली पत्नी को भत्ता देना बंद नहीं कर सकता है।
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जस्टिस रोशन डाल्वी की पीठ ने यह भी कहा कि शरीयत कानून में साफ कहा गया है कि कोई पुरुष तभी दूसरा निकाह कर सकता है, जबकि वह दोनों पत्नियों का समान रूप से खर्च उठाने में सक्षम हो। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी एक महिला की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें पति द्वारा दिए जा रहे भत्ते में बढ़ोतरी की मांग की गई है।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि पति कमा रहा और कमा सकता है और उसने दूसरी शादी कर ली है तो ऐसे में वह पहली पत्नी का भत्ता कम नहीं कर सकता है। याचिका में महिला ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उसके सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति को उसे हर महीने 7900 रुपये भत्ता देने का आदेश दिया गया था। महिला के पति ने कहा था कि उनका तलाक हो चुका है, हालांकि वह अदालत में इस बात का कोई सुबूत पेश नहीं कर सका।
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फैमिली कोर्ट ने पति की सैलरी का चौथाई हिस्सा यानी 7900 रुपये पहली पत्नी को भत्ते के तौर पर देने का आदेश दिया था। लेकिन हाईकोर्ट ने माना फैमिली कोर्ट ने भत्ते की राशि सही तय नहीं की। उसने कहा कि कानून की नजर में पति पत्नी बराबर हैं। इसी के साथ हाईकोर्ट ने भत्ते की राशि 18000 रुपये तय कर दी। इस पर पति ने कहा कि उसकी नौकरी जा चुकी है ऐसे में वह इतना ज्यादा भत्ता नहीं दे सकता है। लेकिन उसके तर्क को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि नौकरी जाना भत्ता नहीं देने का कोई आधार नहीं हो सकता है। यदि उसने दो शादियां की हैं, तो उसे दोनों पत्नियों को बराबर का हक देना होगा।
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