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कोर्ट ने जताया कुत्ते के साक्ष्य पर भरोसा, सजा बरकरार
मुंबई/एजेंसी
Updated Sun, 31 Mar 2013 10:14 PM IST
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बांबे हाईकोर्ट ने पुलिस के कुत्ते के जुटाए गए साक्ष्य के आधार पर एक व्यक्ति को लूट और हत्या के मामले में दोषी ठहराया है। इसके साथ ही कोर्ट ने निचली अदालत के उसे सुनाई गई उम्रकैद की सजा को भी बरकरार रखा।
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इस मामले में एक अन्य व्यक्ति को परेड पहचान के गवाहों की निशानदेही के आधार पर दोषी करार दिया जबकि तीन अन्य को बरी कर दिया।
जस्टिस पीडी कोडे और वीके ताहिलरमानी की डिवीजनल बेंच ने पिछले हफ्ते दिए गए अपने फैसले में एजाबूल जान मोहम्मद शेख और कथाल्या उर्फ रमेश राजा चव्हाण को पहचान परेड और कुत्ते द्वारा जुटाए गए साक्ष्य के आधार पर दोषी करार दिया और उनकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखी।
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सजा को कायम रखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यह वैज्ञानिक तौर पर स्वीकार किया गया है कि कुत्ते बहुत ही समझदार जानवर है और उसकी कुछ अनुभूतियां बहुत ही विकसित और अत्यधिक भरोसेमंद होती हैं।
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कोर्ट ने मनोज कुमार गुप्ता, अशोक चव्हाण और चांड्या पवार को बरी कर दिया। सेवारी सेशन कोर्ट ने 2007 में सभी आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 19 जनवरी 2003 को तड़के आरोपियों ने घाटकोपर इलाके में ममता कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले विशाल मेहता के घर में घुसकर उनके पिता नौतम, मां हंसाबेन और भाई जय की सोते वक्त लोहे के रॉड से हत्या कर दी थी। इन लोगों ने घर में घुसने से पहले वॉचमैन को भी मार डाला था।