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यूपी लोकायुक्तः हाईकोर्ट को फैसला सुनाने की अनुमति

Mon, 29 Oct 2012 10:00 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 29 Oct 2012 10:00 PM IST
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High Court got permission of supreme court  on Lokayukt

उत्तर प्रदेश में लोकायुक्त का कार्यकाल बढ़ाए जाने के खिलाफ दायर मामलों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट अब अपना फैसला सुना सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस मसले पर हाईकोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने के आदेश को हटा लिया। हाईकोर्ट ने लोकायुक्त के मुद्दे पर दायर याचिकाओं पर 19 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सर्वोच्च अदालत ने इसके बाद 25 सितंबर को हाईकोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था। 

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चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाईकोर्ट की कार्यवाही पर लगी रोक हटाने का आदेश तत्कालीन बसपा सरकार में मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी की ओर से दायर आवेदन पर जारी किया। सिद्दकी की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि हाईकोर्ट इस मसले पर सर्वोच्च अदालत की ओर से रोक लगाए जाने से पहले ही फैसला सुरक्षित रख चुका था।
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ऐसी स्थिति में अदालत से गुजारिश है कि हाईकोर्ट की सुनवाई पर रोक लगाने के 25 सितंबर के आदेश को वापस ले। याद रहे कि शीर्षस्थ अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दायर स्थानांतरण याचिका पर पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय, उनके भाई मुकुल और पिता रामचरण सहित नसीमुद्दीन सिद्दीकी को नोटिस जारी किया था और हाईकोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
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पीठ ने अधिवक्ता के तर्क से सहमति जताते हुए रोक लगाने के आदेश को वापस लेते हुए हाईकोर्ट को फैसला जारी करने की मंजूरी प्रदान कर दी। पिछली सुनवाई में इस मुद्दे पर शीर्षस्थ अदालत ने आदेश जारी करने से इनकार करते हुए राज्य सरकार और प्रतिपक्षों से जवाब-तलब किया था।


राज्य सरकार का कहना था कि लोकायुक्त के कार्यकाल से संबंधित मसला शीर्षस्थ अदालत में पहले ही लंबित है। ऐसे में एक मुद्दे पर कई याचिकाओं पर अलग-अलग फैसला आए इससे बेहतर है कि शीर्षस्थ अदालत इस मामले का निपटारा करे।

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