बड़ी खबर: यूपी में खनन पट्टों के आवंटन, नवीनीकरण पर रोक
हाईकोर्ट ने बालू और पत्थर खनन में हो रही व्यापक धांधली को देखते हुए पूरे प्रदेश में नए खनन पट्टे जारी करने पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी है।
अनियमित खनन से पर्यावरण को हो रहे जबरदस्त नुकसान पर चिंता जाहिर करते हुए सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि 31 मई 2015 के बाद पट्टे के लिए दी गई कोई भी अर्जी स्वीकार न की जाए।
इस अवधि में यदि कोई पट्टा दिया गया है तो वह निरस्त माना जाएगा। 31 मई से पूर्व जो पट्टे दिए जा चुके हैं, उनमें खनन होगा मगर अवधि समाप्त होने के बाद उनका भी नवीनीकरण नहीं किया जा सकेगा।
प्राकृतिक स्रोतों के दोहन से पर्यावरण को गंभीर नुकसान
फतेहपुर के ओम प्रकाश की याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति सुनीत अग्रवाल की बेंच ने कहा कि खनन संबंधी मामलों में हाईकोर्ट की विभिन्न न्यायपीठ के फैसले हैं। इससे कई बार भ्रम की स्थिति पैदा होती है।
मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि जुलाई में इसके लिए एक विशेष पीठ नामित कर प्रधानपीठ और लखनऊ पीठ में लंबित सभी याचिकाओं की एक साथ सुनवाई की जाए ताकि पट्टों के आवंटन संबंधी विवादों का अंतिम रूप से निस्तारण हो सके।
खंडपीठ का मत था कि प्रदीप कुमार बनाम हरियाणा राज्य में सुप्रीमकोर्ट ने खनन पट्टे देने के लिए गाइड लाइन तय कर दी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 31 मई 2012 को इसे स्वीकार करते हुए शासनादेश भी जारी किया है। इसके बावजूद अधिकारी मनमाने तरीके से पट्टों का आवंटन कर रहे हैं। प्राकृतिक स्रोतों के मनमाने दोहन से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
याचिका में फतेहपुर के ठेकेदार महेंद्र सिंह परिहार को पट्टा आवंटित नहीं करने की मांग की गई थी। याची का कहना था कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से अवैध खनन के जरिये करोड़ों-अरबों रुपये का वारा-न्यारा किया जाता है। कोर्ट ने ठेकेदार महेंद्र को बालू खनन की अनुमति नहीं देने का आदेश दिया है।