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यूपी: शिक्षकों की भर्ती पर कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब
ब्यूरो/इलाहाबाद
Updated Thu, 05 Sep 2013 12:53 PM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के पद भरे जाने के संबंध में जवाब मांगा है।
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एक जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सरकार से पूछा है कि उसने अब तक शिक्षकों की भर्ती के लिए क्या कदम उठाए हैं।
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हाईकोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह में इसकी जानकारी देने का निर्देश दिया है।
याचिका में कहा गया है कि शिक्षा का अधिकार मौलिक अधिकार है। पदों के रिक्त होने से छह से 14 वर्ष तक बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करने के मौलिक अधिकार का हनन हो रहा है।
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संविधान के अनुच्छेद 21 (ए) के द्वारा यह अधिकार प्रदान किया गया है। इसके बाद केंद्र सरकार ने सर्वशिक्षा अभियान चलाकर सभी बच्चों को स्कूल भेजने की मुहिम चलाई।
प्रदेश सरकार ने भी अनिवार्य शिक्षा कानून 2009 लागू किया। बड़े पैमाने पर शिक्षकों की भर्ती की योजना बनाई गई।
वाराणसी के द राइट आर्गेनाइजेशन द्वारा दाखिल जनहित याचिका में चंदौली जिले का मामला उठाया गया।
चंदौली जिले में शिक्षकों के 10 हजार 800 पदों को भरने के लिए विज्ञापन निकाला गया था। इसमें मानकों की अनदेखी की गई जिसकी वजह से भर्ती का कार्य पूरा नहीं हो सका।
सरकार द्वारा निकाले गए अन्य विज्ञापनों का भी ऐसा ही हश्र हुआ। मनमाने तरीके से अपनाई गई प्रक्रिया के कारण भर्तियां रुकी हुई हैं।